अल नीनो के असर से महंगा हो सकता है चावल, ग्लोबल मार्केट में कीमतें बढ़ने का अनुमान—जानें पूरा मामला – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: दुनियाभर के बाजारों में चावल की कीमतें चालू तिमाही और 2027 की पहली तिमाही में ऊंची बनी रह सकती हैं. इसकी वजह अल नीनो के कारण चावल उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित असर को माना जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की कृषि बाजार सूचना प्रणाली (AMIS) के मुताबिक, अल नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली फसलों में चावल भी शामिल है. AMIS के अनुसार, दुनिया में चावल का बड़ा हिस्सा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में पैदा होता है. अल नीनो के दौरान इन क्षेत्रों में आमतौर पर बारिश कम होती है. इससे चावल की फसल प्रभावित हो सकती है और वैश्विक बाजार में इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.

वहीं, फिच सॉल्यूशंस की रिसर्च एजेंसी BMI ने भी चावल की कीमतों का अनुमान बढ़ा दिया है. एजेंसी ने 2026 में शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (CBOT) में सूचीबद्ध चावल वायदा का औसत भाव 12.9 डॉलर प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 14 डॉलर प्रति क्विंटल कर दिया है. BMI के मुताबिक, 2026 की तीसरी तिमाही में उम्मीद से ज्यादा तेजी आने के कारण यह बदलाव किया गया है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें फिलहाल दो साल के उच्च स्तर के करीब पहुंच गई हैं. अल नीनो के कारण एशिया के प्रमुख चावल उत्पादक देशों में फसल प्रभावित होने की आशंका है. ऐसे में चालू तिमाही और 2027 की पहली तिमाही तक कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं. हालांकि, एशिया में मॉनसून की फसल की स्थिति साफ होने और अमेरिका में कटाई आगे बढ़ने के बाद कीमतों में कुछ गिरावट आ सकती है. रिसर्च एजेंसी BMI के मुताबिक, 2026 की चौथी तिमाही में चावल का औसत भाव 17.5 डॉलर और 2027 की पहली तिमाही में 7.2 डॉलर प्रति क्विंटल रहने का अनुमान है. फिलहाल शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (CBOT) में चावल वायदा का भाव 17.6 डॉलर प्रति क्विंटल से ऊपर है.

जुलाई से अब तक भारत और पाकिस्तान के चावल के निर्यात भाव में 20 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, थाईलैंड और वियतनाम में कीमतें 30 डॉलर प्रति टन तक बढ़ी हैं. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की कृषि बाजार सूचना प्रणाली (AMIS) ने 2026-27 सीजन में वैश्विक चावल उत्पादन 2.4 फीसदी घटकर 55.247 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया है.

अल नीनो का असर भारत, पाकिस्तान, थाईलैंड, इंडोनेशिया, वियतनाम, फिलीपींस और मलेशिया में धान की फसल पर पड़ने की आशंका है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने भारत में चावल उत्पादन 4.6 फीसदी घटकर 14.7 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है. इससे पहले उत्पादन 15 करोड़ टन रहने की संभावना जताई गई थी. उत्पादन का अनुमान घटने से सितंबर से ही बाजार में कीमतों को सहारा मिल रहा है. वहीं, थाईलैंड में भी चावल उत्पादन 1.9 फीसदी घटकर 2.03 करोड़ टन रहने का अनुमान है. वहां कम बुवाई और पानी की उपलब्धता को देखते हुए सरकार की ओर से धान का रकबा घटाने के प्रयासों का असर उत्पादन पर पड़ सकता है.

नीदरलैंड की वित्तीय सेवा कंपनी ING की रिसर्च इकाई ING Think के मुताबिक, अल नीनो से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में चावल उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है. वहीं, राबोबैंक ने भी चेतावनी दी है कि अल नीनो के कारण 2026 की चौथी और 2027 की पहली तिमाही में वैश्विक चावल आपूर्ति, उत्पादन और व्यापार पर दबाव पड़ सकता है.

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की कृषि बाजार सूचना प्रणाली (AMIS) के मुताबिक, पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि अल नीनो के दौरान दुनिया में धान का उत्पादन औसतन करीब 96 लाख टन कम रह जाता है. यह अनुमानित वैश्विक उत्पादन का लगभग 1.2 फीसदी है. हालांकि, AMIS ने साफ किया है कि चावल उत्पादन में गिरावट की एकमात्र वजह अल नीनो नहीं है. फिर भी, पुराने आंकड़ों से इसके संभावित असर का अंदाजा लगाया जा सकता है. वहीं, थाईलैंड में बाढ़ के कारण चावल की ढुलाई प्रभावित हुई है. इससे धान की बुवाई में देरी और फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है. ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के मुताबिक, अल नीनो के मजबूत होने की आशंका ने भी उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है.

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