MP में मिट्टी की जांच से सुधरेगी खेती, 1000 किसानों को जलवायु अनुकूल खेती की ट्रेनिंग देगी FarMart – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: एग्री-फूड कॉमर्स प्लेटफॉर्म FarMart ने अपने ‘प्रोजेक्ट एवरग्रेन’ का विस्तार मध्य प्रदेश में करने का ऐलान किया है. यह इस प्रोजेक्ट का दूसरा चरण है. इसके तहत कंपनी अगले 18 महीनों में मध्य प्रदेश के चुनिंदा जिलों के 1,000 से अधिक छोटे किसानों के साथ काम करेगी. इस दौरान किसानों के खेतों की मिट्टी की 3,000 जांच की जाएंगी. ये जांच तीन बुवाई सीजन में होंगी. इसके आधार पर किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने और जलवायु के अनुकूल खेती करने की सलाह दी जाएगी. कंपनी अपने फील्ड नेटवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों तक यह जानकारी पहुंचाएगी.

कंपनी के मुताबिक, 25 से 28 अक्टूबर के बीच सागर जिले के धाना और टीकमगढ़ में 1,350 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है. इस दौरान किसानों को मौसम के बदलाव के अनुसार खेती करने के तरीके बताए गए. प्रशिक्षण में जलवायु के अनुकूल फसलों का चुनाव, फसलों को बीमारियों से बचाने और मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर खाद और पोषक तत्वों के सही इस्तेमाल की जानकारी दी गई. इसका मकसद किसानों को बेहतर खेती करने और मौसम से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद करना है.

FarMart के मुताबिक, प्रोजेक्ट एवरग्रेन के पहले चरण में फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने पर काम किया गया था. अब दूसरे चरण में कंपनी का ध्यान बुवाई से पहले किसानों के फैसलों को बेहतर बनाने पर है. इसके तहत खाद और अन्य कृषि संसाधनों का सही इस्तेमाल, खेती की लागत में कमी और मौसम की अनिश्चितता से निपटने की तैयारी पर जोर दिया जाएगा.

FarMart की इम्पैक्ट, ESG और पार्टनरशिप डायरेक्टर तान्या गर्ग ने बिजनेसलाइन से कहा कि मध्य प्रदेश देश के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है. इसके बावजूद कई किसान खाद, बीज और बुवाई के समय जैसे अहम फैसले अपनी जमीन और मौसम की स्थिति से जुड़ी सही जानकारी के बिना लेते हैं. उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट एवरग्रेन के जरिए किसानों को पहली बार उनकी अपनी जमीन, फसल और मौसम के हिसाब से मिट्टी की जांच रिपोर्ट समझाकर खेती की सलाह दी जाएगी. कंपनी ने 1,350 किसानों को प्रशिक्षण देने का काम पूरा कर लिया है. अब इन किसानों को खेतों में नई तकनीकों और तरीकों को अपनाने में मदद की जाएगी. तान्या गर्ग के मुताबिक, इस पहल का खास जोर पानी का बेहतर इस्तेमाल करने और किसानों की आमदनी को सुरक्षित रखने पर होगा. कंपनी का मकसद सिर्फ किसानों को जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें उस जानकारी के आधार पर सही कदम उठाने में मदद करना है. साथ ही, हर फसल सीजन में उन्हें जरूरी सहयोग भी दिया जाएगा.

FarMart ने साल 2025 में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट एवरग्रेन का पहला चरण चलाया था. इसके तहत 2,200 से अधिक किसानों को धान और गेहूं की कटाई के बाद फसल का नुकसान कम करने के तरीके बताए गए. कंपनी के मुताबिक, इस पहल का असर एक ही फसल सीजन में देखने को मिला. कार्यक्रम से जुड़े किसानों के धान की फसल में प्रति क्विंटल औसतन 1.92 किलो और गेहूं में 3.25 किलो तक नुकसान कम हुआ. इससे धान की खेती करने वाले किसानों की प्रति किसान औसतन 4,860 रुपये और गेहूं की खेती करने वाले किसानों की 5,687 रुपये तक अतिरिक्त कमाई हुई.

FarMart का लक्ष्य अगले 18 महीनों में प्रोजेक्ट से जुड़े किसानों की शुद्ध आमदनी औसतन 15 से 20 फीसदी तक बढ़ाना है. इसके लिए प्रति एकड़ खेती की लागत में 10 फीसदी की कमी लाने और फसल की पैदावार में 10 से 15 फीसदी तक सुधार करने की योजना है. कंपनी के मुताबिक, मध्य प्रदेश के छोटे किसानों के लिए खेती की लागत कम करना काफी अहम है. खेती में खाद, बीज और दूसरे कृषि संसाधनों पर बड़ा खर्च होता है. ऐसे में इनका सही और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करने से किसानों की लागत घटेगी और उनकी घरेलू आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी.

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