जम्मू-कश्मीर में समय से पहले पकने लगी धान की फसल, अच्छी पैदावार की बढ़ी उम्मीद—जानें पूरा मामला – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में इस साल धान की फसल सामान्य समय से पहले तैयार हो गई है. कश्मीर के कुछ हिस्सों में किसानों का कहना है कि धान जल्दी पकने से उन्हें तय समय से पहले ही खेतों में कटाई शुरू करनी पड़ रही है. किसानों के लिए सिर्फ फसल का जल्दी तैयार होना ही चिंता की वजह नहीं है. वे पैदावार, मौसम, सरकारी खरीद केंद्रों की उपलब्धता और फसल के मिलने वाले भाव पर भी नजर रख रहे हैं. इन सभी चीजों का असर किसानों की कमाई पर पड़ता है.

जम्मू-कश्मीर में धान की कटाई आमतौर पर सितंबर के आखिर से शुरू होती है और अक्टूबर तक चलती है. हालांकि, कटाई का समय धान की किस्म, इलाके और मौसम के हिसाब से अलग-अलग होता है. इस साल कश्मीर के कुछ इलाकों में किसानों ने धान के सामान्य समय से पहले पकने की बात कही है. इससे हजारों किसान परिवारों के लिए फसल कटाई का यह सीजन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो गया है.

जम्मू में कृषि विभाग को इस साल सामान्य धान और ग्रेड-ए चावल की अच्छी पैदावार की उम्मीद है. वहीं, बासमती की खेती करने वाले किसानों के लिए बाजार की स्थिति अलग है. बासमती धान की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) सीधे नहीं करता है, इसलिए इन किसानों को बाजार पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है. जम्मू-कश्मीर में धान की खेती किसानों की आय का एक अहम जरिया है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में धान की खेती का रकबा धीरे-धीरे कम हुआ है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान इस फसल पर निर्भर हैं.

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के कई निचले इलाकों में धान की कटाई शुरू हो गई है. कुछ किसानों का कहना है कि इस साल उनकी फसल उम्मीद से पहले तैयार हो गई. किसानों के मुताबिक, फसल के जल्दी पकने के पीछे मौसम, धान की किस्म और खेती के तरीके जैसे कई कारण हो सकते हैं. इससे इस साल धान की कटाई का समय सामान्य से पहले हो गया है.

किसानों के मुताबिक, धान की फसल आमतौर पर रोपाई के करीब 120 दिन या उससे ज्यादा समय में तैयार होती है. हालांकि, यह अवधि धान की किस्म, नर्सरी की उम्र, रोपाई की तारीख, तापमान और मौसम की स्थिति के आधार पर बदल सकती है. इरशाद अहमद ने कहा कि इस सीजन में SR-4 समेत कुछ किस्में भी अपेक्षाकृत जल्दी तैयार हुई हैं. उन्होंने कहा कि कुछ खेतों में जुलाई में ही धान में फूल आने की प्रक्रिया पूरी हो गई थी.

पुलवामा के किसान इरशाद अहमद का मानना है कि मौसम में बदलाव का असर धान की फसल  पर पड़ा हो सकता है. उन्होंने बताया कि इस साल उनकी फसल पिछले वर्षों के मुकाबले करीब 20 दिन पहले तैयार हो गई. हालांकि, जल्दी पकने के बावजूद पैदावार बढ़ी नहीं है. अहमद के मुताबिक, पिछले साल उन्हें करीब 4 क्विंटल धान की पैदावार मिली थी. इस साल करीब 3.5 क्विंटल पैदावार होने का अनुमान है. वहीं, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसल के जल्दी पकने को पूरी तरह जलवायु परिवर्तन से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी.

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