एग्रीवेट: तेलंगानाा सरकार अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए खाद्यान्न का बफर स्टॉक मजबूत करने की योजना बना रही है. इसका मकसद सूखे, फसल खराब होने और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने की स्थिति में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर निर्भर 3.42 करोड़ लोगों को राहत देना है. सरकार गेहूं के आटे समेत कुछ जरूरी चीजों को भी राशन की दुकानों के जरिए उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए लोगों को गेहूं का आटा, अरहर की दाल, पाम ऑयल, चीनी, इमली, मिर्च पाउडर और दूसरी जरूरी चीजें उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है. इसके लिए संबंधित विभाग को हर लाभार्थी को दी जाने वाली वस्तुओं की मात्रा, खरीद की व्यवस्था और कुल खर्च का आकलन करने को कहा गया है. प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लेने से पहले ये जानकारियां तैयार की जाएंगी.
16 अक्टूबर 2026 तक राज्य के बफर गोदामों में करीब 9.64 लाख टन चावल उपलब्ध था. ताजा अनुमान के मुताबिक, चावल का यह स्टॉक सितंबर 2027 तक जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त होगा. वहीं, सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने राशन वितरण के अलग-अलग विकल्पों पर खर्च का अनुमान पेश किया. इसमें जरूरी वस्तुओं को रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की योजनाएं भी शामिल थीं. ये अनुमान नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी के सामने रखे गए. सरकार का उद्देश्य संभावित संकट के दौरान लोगों को खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों से राहत देना है.
राज्य में चावल के स्टॉक की समीक्षा के बाद नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने अधिकारियों को अनाज की खरीद और भंडारण की योजना पहले से तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि अगर कम बारिश के कारण आने वाले फसल सीजन प्रभावित होते हैं, तब भी राशन की आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए. सरकार का मकसद संभावित सूखे और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के दौरान लोगों को पर्याप्त अनाज और जरूरी सामान उपलब्ध कराना है.
नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि राज्य को आने वाले समय में मौसम खराब रहने की स्थिति के लिए भी तैयार रहना चाहिए. सरकार को केवल अगली धान की फसल अच्छी होने की उम्मीद पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. मंत्री के मुताबिक, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), मिड-डे मील और दूसरी कल्याणकारी योजनाओं की जरूरतें पूरी करने के लिए राज्य को हर महीने करीब 2.38 लाख टन चावल चाहिए. इस हिसाब से सालाना जरूरत लगभग 28.56 लाख टन है. 16 अक्टूबर 2026 तक राज्य के बफर गोदामों में करीब 9.64 लाख टन चावल उपलब्ध था. इसमें 3.50 लाख टन चावल केंद्रीय पूल और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए, जबकि 6.14 लाख टन राज्य के पूल में था.
इसके अलावा, कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की लंबित आपूर्ति और अन्य तय स्रोतों से 18.39 लाख टन चावल मिलने की उम्मीद है. मौजूदा स्टॉक और आने वाली आपूर्ति को मिलाकर राज्य में कुल 28.03 लाख टन चावल उपलब्ध होने का अनुमान है. नागरिक आपूर्ति विभाग के मुताबिक, यह मात्रा PDS और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जरूरतों को करीब 11.7 महीने तक पूरा कर सकती है. यानी मौजूदा अनुमान के अनुसार, सितंबर 2027 तक चावल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है.