एग्रीवेट: खेती से अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने के लिए किसान पारंपरिक फसलों के साथ लकड़ी देने वाले पेड़ों की बागवानी भी कर सकते हैं. यूकेलिप्टस और पॉपुलर जैसे पेड़ कम समय में तैयार हो जाते हैं, लेकिन इनकी खेती में पानी की जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी है. ऐसे में महोगनी की बागवानी भी एक विकल्प हो सकती है. इसकी लकड़ी का इस्तेमाल फर्नीचर, इमारती कामों और वाद्ययंत्र बनाने में किया जाता है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक कुमार के अनुसार, महोगनी के पेड़ करीब 10 से 12 साल में तैयार हो सकते हैं. इसलिए इसकी बागवानी शुरू करने से पहले किसानों को जमीन, पानी की उपलब्धता, पौधों की देखभाल और लकड़ी के बाजार की मांग का आकलन करना चाहिए.
लकड़ी के लिए यूकेलिप्टस और पॉपुलर की बागवानी कई क्षेत्रों में की जाती है. ये पेड़ सामान्य तौर पर करीब 4 से 6 साल में कटाई के लिए तैयार हो सकते हैं, हालांकि उनकी बढ़वार स्थानीय जलवायु, मिट्टी, सिंचाई और देखभाल पर निर्भर करती है. इन पेड़ों को लगाते समय पानी की जरूरत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासकर जिन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है, वहां किसानों को पौधों की जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों का आकलन करके ही बागवानी का फैसला लेना चाहिए.
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, किसान यूकेलिप्टस और पॉपुलर के अलावा महोगनी जैसे इमारती लकड़ी देने वाले पेड़ों पर भी विचार कर सकते हैं. महोगनी की लकड़ी का इस्तेमाल फर्नीचर, सजावटी सामान और वाद्ययंत्र बनाने में किया जाता है. इसकी लकड़ी की गुणवत्ता और बाजार में मांग के आधार पर किसानों को आमदनी का अवसर मिल सकता है. हालांकि, महोगनी जल्दी कमाई देने वाला विकल्प नहीं है. इसका पेड़ तैयार होने में करीब 10 से 12 साल लग सकते हैं. इसलिए किसानों को इसे लंबी अवधि के निवेश के रूप में देखना चाहिए.
महोगनी की बागवानी खेत की मेड़ पर या खेत के अंदर निश्चित दूरी पर की जा सकती है. खेत की सीमा पर पौधे लगाने की स्थिति में एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच करीब 2 मीटर की दूरी रखी जा सकती है. वहीं, खेत के अंदर बागवानी के लिए लाइन से लाइन की दूरी लगभग 3 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी करीब 2 मीटर रखने का सुझाव दिया जाता है. हालांकि, वास्तविक दूरी पौधों की किस्म, मिट्टी, खेती की पद्धति और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए. खेत में पेड़ लगाने से पहले
महोगनी की बागवानी से होने वाली कमाई कई बातों पर निर्भर करती है. इनमें पेड़ों की बढ़वार, लकड़ी की गुणवत्ता, कटाई के समय पेड़ का आकार और बाजार में मिलने वाला भाव शामिल हैं. किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि लंबे समय तक पेड़ों की देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा पर खर्च हो सकता है. इसलिए केवल संभावित मुनाफे के आधार पर बड़े क्षेत्र में पौधे लगाने से बचना चाहिए. बागवानी शुरू करने से पहले कृषि विशेषज्ञ डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक कुमार से सलाह लेने के साथ स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से भी जानकारी लें, अच्छी गुणवत्ता के पौधे चुनें और स्थानीय लकड़ी व्यापारियों से बाजार की मांग की जानकारी जुटाएं. साथ ही, पेड़ों की कटाई और बिक्री से जुड़े स्थानीय नियमों की जानकारी भी जरूर लें.