त्योहार से पहले महंगाई का एक और झटका, BAMUL ने नंदिनी दूध-दही के साथ घी-मक्खन के दाम बढ़ाए – एग्रीवेट

Team Agrivate
6 Min Read

एग्रीवेट: कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के तहत बेंगलुरु मिल्क यूनियन (बीएएमयूएल) ने नंदिनी घी, मक्खन, पनीर और तृप्ति दूध के खुदरा दामों में संशोधन किया है. नई दरें चार नवंबर से लागू कर दी गई हैं. यह बदलाव कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) की ओर से अपने लोकप्रिय नंदिनी दूध के दाम 8 रुपये प्रति लीटर और दही के दाम 14 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए जाने के करीब एक सप्ताह बाद किया गया है.

बेंगलुरु मिल्क यूनियन (BAMUL) की विज्ञप्ति के अनुसार नंदिनी ने घी, पनीर और मक्खन की कीमतों में बढ़ोतरी की है. नई दरों के मुताबिक, नंदिनी घी के 1 लीटर पैकेट की कीमत 715 रुपये से बढ़ाकर 850 रुपये कर दी गई है. यानी इसमें 135 रुपये की वृद्धि हुई है. 5 लीटर घी पैक की कीमत 3,575 रुपये से बढ़ाकर 4,250 रुपये हो गई है, जिसमें 675 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. इसके अलावा मक्खन और पनीर के दाम भी बढ़ाए गए हैं. इन नई कीमतों से उपभोक्ताओं को अब घी, मक्खन और पनीर खरीदने के लिए पहले के मुकाबले अधिक पैसे खर्च करने होंगे.

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने बीते बृहस्पतिवार को दूध की कीमतों में आठ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला किया. कैबिनेट मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने मीडिया को बताया कि प्रति लीटर बढ़ाई गई राशि में से 7 रुपये किसानों को और 1 रुपया सहकारी समितियों को मिलेगा. उन्होंने कहा कि कीमतों में यह बढ़ोतरी 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होगी. कर्नाटक मिल्क फेडरेशन नंदिनी नाम से मिल्क और अन्य उत्पादों की बिक्री करता है.

अब नंदिनी के नीले पैकेट वाले टोंड दूध की कीमत 46 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर हो गई है. दूध की कीमत बढ़ाने के पीछे डेयरी यूनियनों की बढ़ती लागत और कर्नाटक में किसानों से दूध खरीदने की दरों और पड़ोसी राज्यों की दरों के बीच बढ़ता अंतर प्रमुख वजह बताया जा रहा है.

नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने का प्रस्ताव दूध यूनियनों और डेयरी किसानों की लगातार मांग के बाद आया है. प्रतिनिधियों ने दूध के दाम में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की मांग की थी. उनका कहना है कि पशु चारा, हरा चारा, पशुओं की दवाइयों, दूध प्रसंस्करण, परिवहन और पैकेजिंग की लागत बढ़ गई है. सितंबर में भी दूध उत्पादकों ने 8 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की मांग की थी. किसानों के मुताबिक, सूखे की वजह से चारे की उपलब्धता कम हुई है और इसकी लागत बढ़ गई है.

दूध कीमतें नहीं बढ़ने और लागत ज्यादा आने से परेशान दूध किसानों ने निजी दूध कारोबारियों को ज्यादा दाम पर दूध की बिक्री शुरू कर दी थी. इससे कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) की रोजाना दूध खरीद भी पिछले तीन महीनों में घट गई है. दूध की खरीद करीब 1.11 करोड़ लीटर से घटकर 1.03 करोड़ लीटर प्रतिदिन रह गई है. इसके चलते फेडरेशन पर भी कीमत बढ़ाने का दबाव बना हुआ था.

Share This Article