इराक को 1.02 लाख टन बासमती चावल भेजेगा भारत, ढुलाई खर्च में 255 करोड़ रुपये की बचत का है लक्ष्य – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: मध्य पूर्व में जहाजों की आवाजाही में रुकावट और माल ढुलाई महंगी होने के बीच भारतीय चावल निर्यातकों ने खर्च घटाने की पहल की है. भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) तीन बड़े जहाजों से इराक को 1,02,210 टन बासमती चावल भेजेगा. इससे माल ढुलाई का खर्च 350 डॉलर (करीब 26,500 रुपये) से घटकर करीब 90 डॉलर (करीब 8,600 रुपये) प्रति टन रह सकता है. यानी इस व्यवस्था से प्रति टन करीब 260 डॉलर (करीब 24,900 रुपये) की बचत हो सकती है. महासंघ के मुताबिक, इससे माल ढुलाई की लागत में करीब 74 फीसदी तक कमी लाने का लक्ष्य है. इससे मध्य पूर्व के बाजारों में भारतीय चावल का निर्यात जारी रखने और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.

भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) के मुताबिक, इस व्यवस्था से तीन जहाजों के जरिए चावल भेजने पर माल ढुलाई में करीब 2.66 करोड़ डॉलर (255 करोड़ रुपये) की बचत हो सकती है. हालांकि, वास्तविक बचत शिपमेंट की अंतिम लागत और तय शर्तों पर निर्भर करेगी. इस योजना के तहत तीन जहाज इराक के उम्म कसर बंदरगाह पर चावल पहुंचाएंगे. महासंघ ने कहा है कि 36,810 टन बासमती चावल   लेकर गया जहाज MV LAMAR S बंदरगाह पहुंच चुका है. यह बर्थ नंबर 3 पर खड़ा है और इससे चावल उतारने का काम शुरू हो गया है. वहीं, दो अन्य जहाजों MV LOLO GATE और MV OUTLANDER को भी इस काम के लिए चुना गया है. इनमें क्रमशः 25,500 टन और 39,900 टन बासमती चावल भेजा जाएगा. यह पहल ऐसे समय में की गई है, जब निर्यातकों को माल ढुलाई की बढ़ती लागत और सामान भेजने में अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है. खाड़ी क्षेत्र भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा क्षेत्रीय बाजार है. ऐसे में माल ढुलाई की लागत कम करने से निर्यातकों को राहत मिल सकती है.

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में मध्य पूर्व के देशों को 45.64 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया. इसकी कीमत 34,284 करोड़ रुपये रही. भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) के मुताबिक, यह भारत के कुल बासमती चावल निर्यात का करीब 70 फीसदी है. बासमती के अलावा गैर-बासमती चावल को शामिल करें, तो इस क्षेत्र में कुल निर्यात 56.48 लाख टन रहा, जिसकी कीमत 39,657 करोड़ रुपये थी.

IREF के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में मध्य पूर्व में भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार सऊदी अरब रहा. उसने 8,324 करोड़ रुपये का बासमती चावल खरीदा. इसके बाद ईरान ने 6,970 करोड़ रुपये, इराक ने 5,583 करोड़ रुपये और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 4,132 करोड़ रुपये का बासमती चावल आयात किया. इस दौरान इराक ने भारत से करीब 7.64 लाख टन बासमती चावल खरीदा. इससे साफ है कि इराक के बाजार में भारतीय चावल की बड़ी मांग है. ऐसे में वहां चावल की समय पर आपूर्ति और माल ढुलाई की लागत कम रखना निर्यातकों के लिए अहम है.

IREF के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव गर्ग ने बिजनेसलाइन से कहा कि भारत के बासमती चावल निर्यात का करीब 70 फीसदी हिस्सा मध्य पूर्व के देशों में जाता है. ऐसे में जहाज से माल भेजने का खर्च बढ़ने से भारतीय चावल दूसरे देशों के मुकाबले महंगा हो सकता है. उन्होंने कहा कि माल ढुलाई का खर्च 350 डॉलर से घटाकर 90 डॉलर प्रति टन करने की पहल से भारतीय निर्यातकों और विदेशी खरीदारों, दोनों को फायदा हो सकता है. महासंघ का लक्ष्य खाड़ी क्षेत्र के दूसरे देशों के लिए भी ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे भारत का चावल निर्यात बढ़े और कारोबार से जुड़े सभी पक्षों को बेहतर लाभ मिल सके.

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