पश्चिम एशिया संकट का पंजाब के बासमती कारोबार पर असर, निर्यातकों ने मंडियों से खरीद घटाई – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर पंजाब के बासमती कारोबार पर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. शिपिंग रूट प्रभावित होने, माल ढुलाई का खर्च बढ़ने और विदेशी बाजारों में अनिश्चितता के कारण निर्यातकों और मिलर्स ने मंडियों से बासमती की खरीद कम कर दी है. हालांकि, पंजाब की मंडियों में अब बासमती की नई फसल की आवक शुरू हो रही है. ऐसे में मिलर्स के पास सीमित भंडारण क्षमता भी बड़ी चिंता बन गई है. निर्यात में कमी और मंडियों में बढ़ती आवक के बीच किसानों से खरीद और फसल के भंडारण पर दबाव बढ़ सकता है.

बासमती एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन पंजाब के अध्यक्ष बल कृष्ण गर्ग ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि भारत हर महीने करीब 5 लाख टन बासमती चावल  का निर्यात करता है. इसमें पंजाब की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई है. गर्ग ने कहा कि पश्चिम एशिया में फरवरी में युद्ध शुरू होने से पहले पंजाब के निर्यातक हर महीने करीब 1.6 लाख टन बासमती चावल निर्यात करते थे. अब इसमें काफी गिरावट आई है.

गर्ग के मुताबिक, संघर्ष के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने अपनी सेवाएं सीमित कर दी हैं. इसके चलते माल ढुलाई यानी फ्रेट की लागत पहले के मुकाबले करीब 10 गुना बढ़ गई है. इससे निर्यातकों की लागत बढ़ी है और विदेशी बाजारों को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है. इस स्थिति का असर बासमती की खरीद पर भी पड़ रहा है. निर्यातक और मिलर्स मंडियों से पहले की तुलना में कम मात्रा में बासमती खरीद रहे हैं, जिससे पंजाब की बासमती फसल के बाजार पर दबाव बढ़ सकता है.

बल कृष्ण गर्ग ने कहा कि पहले दुबई तक एक कंटेनर भेजने में करीब 500 डॉलर (47,967 रुपये) खर्च होते थे. अब यही खर्च बढ़कर 5,000 डॉलर (4,79,677 रुपये) से ज्यादा हो गया है. उनके मुताबिक, माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से बासमती चावल के निर्यात में भी कमी आई है. हालांकि, सऊदी अरब बासमती चावल के बड़े खरीदारों में शामिल है. पहले सऊदी अरब भेजी जाने वाली बासमती की खेप दम्माम पोर्ट के रास्ते जाती थी. लेकिन अब दम्माम तक माल भेजना मुश्किल हो गया है. इसलिए निर्यातक खेप को लाल सागर की तरफ स्थित जेद्दा पोर्ट के रास्ते भेज रहे हैं.

बल कृष्ण गर्ग ने कहा कि कम समय में बासमती की भंडारण क्षमता बढ़ाना संभव नहीं है. ऐसे में अगर निर्यात लंबे समय तक कमजोर रहता है तो मिलर्स के पास ज्यादा मात्रा में धान रखने की जगह नहीं होगी. इसलिए उन्हें मंडियों से बासमती की खरीद कम करनी पड़ सकती है. वहीं, मोगा स्थित GG Agrotech के रॉबिन गोयल ने कहा है कि उनकी कंपनी का बासमती निर्यात फरवरी से पहले के मुकाबले घटकर करीब आधा रह गया है. कंपनी पश्चिम एशिया के देशों को बासमती चावल का निर्यात करती है. गोयल के मुताबिक, कंपनी ने पिछले साल मंडियों से करीब 80,000 मीट्रिक टन बासमती खरीदा था. इस साल कंपनी ने अधिकतम 50,000 मीट्रिक टन खरीदने की योजना बनाई है.

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