एग्रीवेट: नकली और घटिया बीजों की वजह से किसानों को फसल खराब होने और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है. इस समस्या पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार नया बीज कानून लाने की तैयारी कर रही है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान संगठनों के साथ बैठक कर प्रस्तावित कानून पर चर्चा की. सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून के दायरे से करीब 70 प्रतिशत बीज बाहर हैं. नए कानून में बीजों की पहचान के लिए ट्रैकिंग व्यवस्था बनाने और खराब बीज बेचने वालों की जवाबदेही तय करने का प्रस्ताव है. साथ ही, किसानों के पारंपरिक बीजों और उनके अधिकारों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया जा रहा है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के कृषि भवन में 20 से अधिक किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. इसमें प्रस्तावित बीज कानून के प्रावधानों और किसानों की चिंताओं पर चर्चा हुई. कृषि मंत्री ने बताया कि मौजूदा बीज अधिनियम 1966 में बना था, जबकि बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था. समय के साथ खेती और बीज बाजार में काफी बदलाव आया है, लेकिन मौजूदा कानून में कई कमियां बनी हुई हैं. सरकार के मुताबिक, देश में इस्तेमाल होने वाले करीब 70 प्रतिशत बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर हैं. ऐसे में नकली और घटिया बीजों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण करना चुनौती बना हुआ है. नए कानून के जरिए इस कमी को दूर करने और किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है.
प्रस्तावित कानून में बीजों की पहचान और उनकी निगरानी के लिए ट्रैकिंग व्यवस्था विकसित करने की योजना है. इससे बीज की किस्म और उसके स्रोत का पता लगाने में मदद मिलेगी. किसानों को असली बीज की पहचान करने में आसानी होगी और बाजार में नकली बीज बेचने वालों पर कार्रवाई का रास्ता मजबूत हो सकेगा. मौजूदा व्यवस्था में खराब बीजों के उत्पादन और बिक्री के लिए जिम्मेदारी तय करने तथा दोषियों को सजा देने की व्यवस्था को पर्याप्त प्रभावी नहीं माना जा रहा है. नए प्रस्ताव में अपराधों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की बात कही गई है. छोटी गलती पर पहली बार चेतावनी और दोबारा गलती करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है. इसका उद्देश्य बीज कारोबार में जवाबदेही बढ़ाना और किसानों को नुकसान से बचाना है.
नए कानून को लेकर किसानों के मन में यह चिंता भी है कि कहीं पारंपरिक बीजों के इस्तेमाल और आपसी लेन-देन पर रोक न लग जाए. इस पर कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रस्तावित कानून से किसानों के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे. किसान अपने पारंपरिक बीजों का इस्तेमाल कर सकेंगे, उन्हें दूसरे किसानों के साथ साझा कर सकेंगे और बेच भी सकेंगे. सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, किसानों पर अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण की व्यवस्था लागू नहीं होगी. किसान अपने इस्तेमाल के लिए बीज तैयार करें, गांव में दूसरे किसानों को दें या किसी कंपनी के लिए उत्पादन करें, उन्हें केवल इस आधार पर पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी. हालांकि, किसान चाहें तो अपनी किसी खास किस्म का स्वेच्छा से पंजीकरण करा सकेंगे. इससे पारंपरिक बीजों को सुरक्षित रखने के साथ किसानों की स्वतंत्रता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए बीज कानून को जल्दबाजी में लागू करने की योजना नहीं है. कृषि मंत्री के अनुसार, नवंबर-दिसंबर 2025 में विधेयक के मसौदे पर जनता से सुझाव मांगे गए थे. इस दौरान किसानों और विभिन्न संगठनों से करीब 18,000 सुझाव मिले. सरकार का कहना है कि व्यक्तिगत किसान और किसान संगठन भी अपने सुझाव दे सकते हैं. इन सुझावों पर विचार करने के बाद ही कानून को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा. ऐसे में प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य नकली बीजों पर रोक लगाना, बीज कंपनियों की जवाबदेही तय करना और किसानों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना है. हालांकि, किसानों को वास्तविक राहत कितनी मिलेगी, यह कानून के अंतिम प्रावधानों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा.