एग्रीवेट: आंध्र प्रदेश में अल नीनो के असर, पानी की कमी और खराब मौसम जैसी चुनौतियों के बावजूद खरीफ फसलों की बुवाई अच्छी रही है. राज्य में किसानों ने कुल 28.68 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई की है. इसमें धान का रकबा 14.54 लाख हेक्टेयर रहा. वहीं, दलहन फसलों की बुवाई का रकबा इस सीजन के सामान्य स्तर से काफी ज्यादा रहा. हालांकि, बुवाई के अच्छे आंकड़ों के बावजूद किसानों की आर्थिक परेशानी बढ़ रही है. कई किसानों का कहना है कि बार-बार बुवाई करनी पड़ने, सिंचाई के लिए पानी की कमी और खाद व मोटर पंप पर बढ़ते खर्च के कारण खेती की लागत दोगुनी हो गई है.
आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों की बुवाई का कुल रकबा अब तक 28.68 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है. पूरे सीजन के लिए सामान्य रकबा 30.84 लाख हेक्टेयर है. इस तरह राज्य में बुवाई का करीब 93 फीसदी लक्ष्य पूरा हो चुका है. हालांकि, ज्यादातर जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश होने के बावजूद किसानों ने बुवाई जारी रखी. राज्य की प्रमुख फसल धान की बुवाई 14.54 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पूरे सीजन का सामान्य रकबा 15.14 लाख हेक्टेयर है. इस तरह धान की बुवाई करीब 96 फीसदी लक्ष्य तक पहुंच गई है. बारिश में कमी और सिंचाई के पानी की चिंता के बावजूद धान का रकबा सामान्य स्तर के करीब बना हुआ है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में दलहन की बुवाई का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा है. इनकी बुवाई 4.80 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि सामान्य क्षेत्रफल 3.46 लाख हेक्टेयर है. अरहर की बुवाई 4.13 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि इसका सामान्य क्षेत्रफल 2.96 लाख हेक्टेयर है. उड़द और मूंग की बुवाई भी सामान्य लक्ष्य से आगे रही. वहीं, राज्य में खाद्यान्न फसलों का कुल रकबा 21.29 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि सामान्य क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर है.
दूसरी ओर, तिलहन की बुवाई अभी सामान्य से काफी पीछे है. राज्य में 4.50 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्रफल के मुकाबले केवल 2.47 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई है. मूंगफली का रकबा 1.91 लाख हेक्टेयर है, जबकि सामान्य क्षेत्रफल 3.87 लाख हेक्टेयर है. कपास की बुवाई 4.72 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो इसके सामान्य क्षेत्रफल 5.15 लाख हेक्टेयर से कम है.
राज्य में अब तक 637.6 मिमी सामान्य बारिश के मुकाबले 392.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है. यानी बारिश में 38.4 फीसदी की कमी है. राज्य के 28 जिलों में से केवल श्रीकाकुलम, अल्लूरी सीताराम राजू और विशाखापत्तनम में सामान्य बारिश हुई है. वहीं, 24 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. प्रकाशम एकमात्र जिला है, जहां बारिश में बड़ी कमी दर्ज की गई है. उत्तर-पूर्वी मॉनसून की कमजोर शुरुआत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य में 1 अक्टूबर से अब तक सामान्य 57.5 मिमी के मुकाबले सिर्फ 10.3 मिमी बारिश हुई है. यानी बारिश में 82.1 फीसदी की कमी दर्ज की गई है.
वहीं, राज्य के सात प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडार घटकर 402.99 टीएमसी रह गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 788.44 टीएमसी था. इससे खड़ी फसलों के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है. बारिश की कमी से किसानों की खेती की लागत बढ़ रही है और फसल से कमाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. कई इलाकों में फसलें सूखने के कारण किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी है. इससे एक ही सीजन में खेती पर दो बार खर्च करना पड़ा है. इसके अलावा, खेतों में पानी पहुंचाने के लिए मोटर चलाने पर भी ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है. खाद और खेती से जुड़ी अन्य चीजों की बढ़ती लागत ने किसानों की आर्थिक परेशानी और बढ़ा दी है.