एग्रीवेट: Coffee Production India: भारत के कॉफी उगाने वाले इलाकों में इस बार मौसम किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहा है. पश्चिमी घाट के कई हिस्सों में मॉनसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हुई है. लंबे समय तक बारिश नहीं होने से कॉफी के पौधों की बढ़त और फसल पर असर पड़ रहा है. वहीं, सफेद तना छेदक कीट के हमले ने अरेबिका कॉफी उगाने वाले किसानों की चिंता और बढ़ा दी है. इन हालात को देखते हुए साल 2026-27 में देश में अरेबिका कॉफी की पैदावार पहले लगाए गए अनुमान से कम रह सकती है. अगर उत्पादन घटता है, तो इससे कॉफी किसानों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है.
कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी का असर फसल पर साफ दिखाई दे रहा है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ साउथ इंडिया की कॉफी समिति के अध्यक्ष सहदेव बालकृष्ण ने बताया कि, कई बागानों में मॉनसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हुई. इसके साथ ही अरेबिका कॉफी पर सफेद तना छेदक कीट का गंभीर हमला देखा जा रहा है.
यह कीट कॉफी के पौधों के तने में घुसकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है. इससे पौधे कमजोर हो सकते हैं और फसल पर असर पड़ सकता है. बालकृष्ण के अनुसार, इस साल कुछ इलाकों में जनवरी-फरवरी में ही फूल आने के लिए बारिश हो गई थी. इसके चलते कुछ जगहों पर कॉफी की कटाई भी जल्दी शुरू हो गई. हालांकि, फसल की असली स्थिति नवंबर की शुरुआत में ज्यादा साफ हो पाएगी.
रिपोर्ट में सहदेव बालकृष्ण का कहना है कि, इस सीजन में देश में अरेबिका कॉफी का उत्पादन 1.10 लाख टन से ज्यादा रहने की संभावना कम है. पिछले फसल वर्ष 2025-26 में इसका उत्पादन करीब 1.11 लाख टन रहा था. कॉफी बोर्ड ने शुरुआती अनुमान में 2026-27 के दौरान देश में अरेबिका का उत्पादन 1.20 लाख टन रहने की उम्मीद जताई थी. लेकिन कम बारिश और कीटों के बढ़ते हमले के कारण अब इस अनुमान पर सवाल उठ रहे हैं.
देश के प्रमुख कॉफी उत्पादक राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु में अरेबिका की फसल कमजोर रहने की आशंका है. अनुमान है कि इन दोनों राज्यों में पिछले साल के मुकाबले उत्पादन 5,000 से 10,000 टन तक घट सकता है. हालांकि, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कॉफी की खेती बढ़ने से कुछ नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद है.
पिछले साल कर्नाटक में ही 79,145 टन अरेबिका कॉफी का उत्पादन हुआ था. यह देश के कुल उत्पादन में बड़ा हिस्सा है. इसलिए राज्य में फसल कमजोर रहने का असर देश के कुल उत्पादन पर भी पड़ सकता है.
कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एम.सी. करियप्पा के मुताबिक, राज्य के करीब 25 फीसदी कॉफी उत्पादक इलाकों में ही इस साल संतोषजनक बारिश हुई है. बाकी करीब 75 फीसदी क्षेत्रों में बारिश की कमी रही.
कॉफी की फसल को नुकसान से बचाने के लिए कीटों पर समय रहते काबू पाना जरूरी है. लेकिन बागानों में काम करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं, जिससे कीटों से फसल को बचाना भी मुश्किल हो रहा है. ऐसे में किसानों के सामने मौसम की मार और कीटों से फसल बचाने, दोनों की चुनौती है. नवंबर की शुरुआत में जब फसल की स्थिति का अंदाजा मिलेगा, तभी साफ हो पाएगा कि साल 2026-27 में अरेबिका कॉफी की पैदावार कितनी घट सकती है.