एग्रीवेट: बेंगलुरु नेशनल हाईवे पर गन्ना किसानों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया है. बुधवार को महाराष्ट्र के किसान नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी की अगुआई में किसानों का एक बड़ा समूह NH 48 पुणे-बेंगलुरु कोल्हापुर के पास हाईवे पर बैठ गया था जिससे गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई. बुधवार देर रात किसानों ने चक्का जाम का आंदोलन खत्म कर दिया और उसे चीनी मिलों की तरफ मोड़ दिया. यानी राजू शेट्टी के नेतृत्व में किसान अब चीनी मिलों के बाहर आंदोलन करेंगे. किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी तबतक मिलों में गन्ना पेराई का काम शुरू नहीं होगा.
कोल्हापुर में ‘आजतक’ के संवाददाता दीपक सूर्यवंशी ने बताया, गन्ना उत्पादक किसानों की मांगों के समर्थन में स्वाभिमानी शेतकरी संघटना द्वारा शुरू किए गए महामार्ग रोको आंदोलन को दूसरे दिन वापस ले लिया गया है. इसके बाद पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगभग 31 घंटे के बाद वाहनों की आवाजाही बहाल हो गई है.
स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के संस्थापक और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है कि अब आंदोलन की दिशा बदलकर महाराष्ट्र के सातारा जिले के कराड में संचालित चीनी कारखाने को बंद कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर से जिन जिलों में कारखाने चालू हैं, वहां उन्हें बंद कराने की मुहिम शुरू होगी.
राजू शेट्टी ने बताया कि आंदोलन के दो दल बनाए गए हैं—एक दल हुबली की ओर रवाना हो चुका है, जबकि दूसरा दल राज्य के चिनी कारखानों को बंद कराने के लिए तैनात किया जाएगा. गुरुवार को सबसे पहले सातारा जिले के कराड स्थित कृष्णा चिनी फैक्टरी को बंद कराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी.
किसानों ने कहा, अब हाईवे रोको के बजाय चालू चीनी कारखानों को बंद कराने और गन्ने के ट्रैक्टर-ट्रक रोकने की रणनीति अपनाई जा रही है. कारखानों से साखर (चीनी) बाहर न जाने देने की भी चेतावनी दी गई है.
महाराष्ट्र-कर्नाटक बॉर्डर पर स्थित कोग्नोली टोल प्लाजा पर मंगलवार सुबह 11 बजे से स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के प्रमुख राजू शेट्टी के नेतृत्व में चक्का जाम आंदोलन शुरू हुआ. किसानों ने मांग की कि चीनी का न्यूनतम खुदरा मूल्य 50 रुपये प्रति किलो और इथेनॉल की खरीद कीमत 70 रुपये प्रति किलो तय की जाए. वहीं, कर्नाटक के कुछ संगठनों ने बेलगावी के पास हट्टार्गी टोल बूथ पर भी नाकेबंदी कर दी.
‘किसान तक’ से खास बातचीत में राजू शेट्टी ने गन्ना किसानों की मांगें रखीं और बताया कि आंदोलन केवल हाईवे जाम करने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसकी दिशा चीनी मिलों तक जाएगी.
किसान नेता राजू शेट्टी ने बातचीत में कहा कि उनकी पहली मांग गन्ने के दाम में 500 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी करने की है. इसके अलावा चीनी और इथेनॉल के दाम बढ़ाने की भी मांग की जा रही है. इथेनॉल का रेट बढ़ाकर 70 रुपये लीटर करने की है. उनका कहना है कि ऐसा होने पर किसानों को गन्ने का बेहतर और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा.
राजू शेट्टी ने बताया कि सरकार ने इस बार गन्ने की कटाई सामान्य समय से 15 दिन पहले शुरू करने और चीनी मिलों को भी जल्द चालू करने का फैसला किया है. लेकिन इससे किसानों और चीनी मिलों दोनों को नुकसान होगा. उनके अनुसार, समय से पहले गन्ने की कटाई करने पर किसानों को करीब 20 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का नुकसान झेलना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि जिस समय कटाई की बात कही जा रही है, उस समय गन्ने में रस बनने की प्रक्रिया चल रही होती है. ऐसे में जल्दी कटाई करने से गन्ने की क्वालिटी प्रभावित होगी और चीनी मिलों को भी चीनी की रिकवरी कम मिलेगी.
इसी वजह से आंदोलन कर रहे किसानों ने फैसला किया है कि वे अपने खेतों से गन्ना चीनी मिलों तक नहीं पहुंचने देंगे. साथ ही चीनी मिलों से तैयार चीनी को बाजार में भेजने का भी विरोध करेंगे. राजू शेट्टी ने कहा कि किसान मिलों के बाहर डटे रहेंगे और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे. इसी मांग पर अड़ते हुए राजू शेट्टी के नेतृत्व में किसानों का एक दल गुरुवार को सातारा जिले कराड शहर की ओर निकल गया जहां गन्ना पेराई शुरू करने का विरोध होगा. महाराष्ट्र सरकार ने 15 अक्टूबर से गन्ना पेराई शुरू करने का निर्देश दिया है जो कि सामान्य तारीख से 15 दिन पहले है.
कराड के ‘आजतक’ संवाददाता सकलेन मुलानी ने बताया कि राजू शेट्टी के नेतृत्व में 500 किसानों का दल चीनी कारखानों की ओर बढ़ गया है. इसमें कुछ किसान पड़ोस के सांगली जिले में कारखानों को बंद कराएगा जबकि एक दल सातारा की चीनी मिलों के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगा.