एग्रीवेट: पंजाब में धान की कटाई के सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में राज्य में पराली जलाने की 51 घटनाएं दर्ज की गईं. धान कटाई के इस सीजन में एक दिन में पराली जलाने की यह अब तक की सबसे अधिक संख्या है. इसके साथ ही 13 अक्टूबर तक कुल घटनाओं की संख्या बढ़कर 174 हो गई है. ऐसे में लोगों को चिंता सता रही है कि क्या इस बार भी हर साल की तरह दिल्ली की हवा जहरीली हो जाएगी और राजधानी को गैस चैंबर जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा.
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल इसी अवधि में पराली जलाने की 126 घटनाएं दर्ज की गई थीं. इस तरह इस साल अब तक 48 घटनाएं ज्यादा हुई हैं. पिछले साल 13 अक्टूबर तक राज्य में पराली जलाने के 100 मामलों का आंकड़ा पार नहीं हुआ था, जबकि इस साल यह आंकड़ा 8 अक्टूबर को ही पार हो गया था.
जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में इस सीजन पराली जलाने की सबसे ज्यादा घटनाएं अमृतसर और तरनतारन में दर्ज की गई हैं. अमृतसर में अब तक 77 और तरनतारन में 61 मामले सामने आए हैं. दोनों जिलों को मिलाकर कुल 138 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इसके अलावा, फिरोजपुर में पराली जलाने के 8 मामले सामने आए हैं. गुरदासपुर और मुक्तसर में 5-5, जबकि मोगा, पटियाला और संगरूर में 3-3 घटनाएं दर्ज की गई हैं. ज्यादातर मामले उन जिलों में सामने आए हैं, जहां जल्दी पकने वाली धान की किस्मों की बुवाई की गई थी. वहीं, कई जिलों और इलाकों में अभी धान की कटाई शुरू नहीं हुई है.
पंजाब के बरनाला, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना, मानसा, पठानकोट, रूपनगर और मलेरकोटला जिलों में 13 अक्टूबर तक पराली जलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल 15 सितंबर से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने की प्रक्रिया शुरू होती है, जबकि धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होती है. पिछले साल पंजाब में पराली जलाने के 5,114 मामले दर्ज किए गए थे. वहीं, 2024 में यह संख्या 10,909 थी. इस तरह पिछले साल पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई थी.
पराली जलाना उत्तर-पश्चिम भारत और दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की एक बड़ी वजह माना जाता है. कई अध्ययनों में सामने आया है कि कुछ किसान सैटेलाइट की नजर से बचने के लिए दोपहर 3 बजे के बाद खेतों में पराली जलाते हैं. इसी वजह से सरकार ने जमीन पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई है.दिल्ली और एनसीआर में सितंबर के मध्य से ही हवा की गुणवत्ता खराब होने लगती है. सर्दियों की शुरुआत के साथ पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण भी बढ़ जाता है. हर साल सर्दियों में दिल्ली को घने स्मॉग का सामना करना पड़ता है. दिवाली के आसपास पटाखे जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है. प्रतिबंधों के बावजूद पटाखे जलाने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता और खराब हो जाती है.
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने निगरानी और कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया है. मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अधिकारियों से जमीन पर निगरानी बढ़ाने और नियमों का सख्ती से पालन कराने को कहा. उन्होंने खास तौर पर दोपहर 3 बजे के बाद पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने की जरूरत बताई. भूपेंद्र यादव ने पंजाब के संगरूर, तरनतारन, अमृतसर, पटियाला और गुरदासपुर जिलों पर विशेष ध्यान देने को कहा. वहीं, हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और फतेहाबाद में भी फसल कटाई के रुझानों का आकलन करने के निर्देश दिए.