एग्रीवेट: Maharashtra Drought: महाराष्ट्र में कम बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. कहीं खेतों में खड़ी फसलें सूख रही हैं, तो कहीं बारिश कम होने के कारण किसान बुवाई तक नहीं कर पाए. ऐसे में अब किसानों को केंद्र सरकार से मिलने वाली राहत का इंतजार है. सूखे से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए महाराष्ट्र पहुंची केंद्रीय टीम अगले सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप सकती है. इस रिपोर्ट के आधार पर किसानों को मिलने वाली आर्थिक मदद तय करने में सहायता मिलेगी.
शनिवार को केंद्रीय टीम ने महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा किया. टीम ने मंगलवेढ़ा तहसील के आधगांव से अपना निरीक्षण शुरू किया. इसके बाद लेंडवे चिंचोली और गोनेवाड़ी का दौरा किया. आखिर में सांगोला तहसील के वाकी घेरडी में निरीक्षण पूरा किया गया. इस दौरान टीम ने तीन तहसीलों के प्रभावित गांवों में जाकर किसानों से बातचीत की.
दरअसल, इस मॉनसूनी सीजन में कम बारिश के चलते महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की 265 तहसीलों में सूखे का ऐलान किया है. नुकसान का सही आकलन करने और केंद्र से आर्थिक मदद दिलाने के लिए केंद्रीय टीमें अलग-अलग इलाकों का दौरा कर रही हैं. इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर नुकसान का जायजा लेने के लिए 10 टीमें भेजने का अनुरोध किया था.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के कृषि आयुक्त सूरज मांढरे के मुताबिक, केंद्रीय टीम की रिपोर्ट सात दिनों के भीतर आने की उम्मीद है. आमतौर पर राष्ट्रीय आपदा राहत कोष के तहत नुकसान का आकलन करने और रिपोर्ट तैयार करने में करीब एक महीने का समय लग सकता है. लेकिन सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए इस काम में तेजी लाई जा रही है.
राज्य में किसानों की फसलों को हुए नुकसान का पता लगाने के लिए पंचनामा भी किया जा रहा है. इसमें खेतों का जायजा लेकर यह दर्ज किया जाता है कि, फसल को कितना नुकसान हुआ है. बैंगन जैसी सब्जियों की फसलों को भी इस आकलन में शामिल किया जा रहा है, ताकि किसानों के नुकसान की सही जानकारी मिल सके.
महाराष्ट्र में सूखे का असर हर जगह एक जैसा नहीं है. कुछ इलाकों में किसानों ने बुवाई तो कर दी, लेकिन कम बारिश के कारण फसलें खराब हो गईं. वहीं, कुछ जगहों पर खेतों में नमी की कमी के चलते किसान बुवाई ही नहीं कर पाए. ऐसे इलाकों से भी सरकार के पास राहत देने की मांग पहुंच रही है. इसलिए नुकसान का आकलन करते समय अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति को ध्यान में रखा जा रहा है. केंद्रीय टीम राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आई मांगों और नुकसान की जानकारी पर विचार करेगी.
वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सूखा प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत कार्यों की समीक्षा के लिए बैठक भी करेंगे. केंद्रीय टीम की रिपोर्ट और किसानों की जरूरतों का आकलन होने के बाद राज्य सरकार राहत को लेकर आगे का फैसला ले सकती है.
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में 1 जून से 30 सितंबर के बीच 804.4 मिलीमीटर बारिश हुई. जबकि इस दौरान सामान्य बारिश का आंकड़ा 994.5 मिलीमीटर है. यानी राज्य में औसत से करीब 19 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग के अनुसार, 3 अक्टूबर को महाराष्ट्र से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी हो गई. पिछले चार वर्षों में मॉनसून की वापसी इतनी जल्दी नहीं हुई थी.
इस सीजन में राज्य के 21 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई. इनमें नागपुर, चंद्रपुर, हिंगोली, बीड और धाराशिव शामिल हैं. दूसरी ओर, मुंबई, ठाणे, पुणे, रायगढ़ और रत्नागिरी में सामान्य बारिश दर्ज की गई. नासिक और पालघर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई.