एग्रीवेट: 29 सितंबर 2026, इंदौर: खाद्य तेल सप्लाई चेन एवं पुनर्योजी कृषि हितधारकों के साथ परामर्श कार्यशाला आयोजित – नेशनल एलायंस फॉर रिजेनरेटिव एग्रीकल्चर वेजिटेबल ऑयल सेक्टर (NARVOS) प्लेटफॉर्म के अंतर्गत सोलिडरीडाड संस्था द्वारा पुनर्योजी कृषि एवं सतत खाद्य तेल आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने तथा स्थानीय स्तर पर विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय एवं सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से इंदौर में खाद्य तेल सप्लाई चैन एवं पुनर्योजी कृषि से जुड़े हितधारकों के साथ परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर किसानों, FPOs, निजी क्षेत्र, एग्री-टेक कंपनियों, CSOs, डिजिटल कृषि सेवा प्रदाताओं एवं अन्य संबंधित हितधारकों के बीच संवाद को बढ़ावा देना, साझा समझ विकसित करना तथा पुनर्योजी एवं जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों को खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला से जोड़ने के अवसरों की पहचान करना रहा। कार्यशाला में 40 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया। इसमें एग्रीटेक, कृषि इनपुट कंपनियों, स्टार्टअप, डिजिटल एग्री सर्विस प्रदाताओं, सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) तथा NARVOS के सदस्यों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल रहे।
कार्यशाला के दौरान पुनर्योजी कृषि, जलवायु-स्मार्ट कृषि, नीतिगत एवं बाजार रुझान, सतत खाद्य तेल उत्पादन, FPO सुदृढ़ीकरण, कृषि उपज का एकत्रीकरण एवं ट्रेसबिलिटी, बाजार संपर्क, डिजिटल कृषि सेवाएं, जिम्मेदार श्रम प्रथाएं तथा खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला में हितधारकों के बीच स्थानीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। हितधारकों ने किसानों तक तकनीकी जानकारी एवं सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, FPOs की क्षमता मजबूत करने, बाजार से बेहतर जुड़ाव विकसित करने तथा उत्पादन से बाजार तक पारदर्शिता एवं ट्रेसबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए संभावित सहयोग के अवसरों पर अपने विचार साझा किए।
परामर्श के दौरान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध तकनीकी, डिजिटल एवं बाजार आधारित समाधानों का उपयोग बढ़ाने तथा किसानों और FPOs को खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला के विभिन्न हितधारकों से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हितधारकों को एक साझा मंच पर लाकर ज्ञान, अनुभव एवं नवाचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया गया। यह पहल मध्य प्रदेश में पुनर्योजी कृषि एवं सतत खाद्य तेल आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने तथा स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय एवं सहयोग विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।