भारत में पैराक्वाट खरपतवार नाशक पर लगा प्रतिबंध—जानें पूरा मामला – एग्रीवेट

Team Agrivate
7 Min Read
भारत में पैराक्वाट खरपतवार नाशक पर लगा प्रतिबंध—जानें पूरा मामला - एग्रीवेट - भारत में पैराक्वाट

एग्रीवेट: 29 सितंबर 2026, नई दिल्ली: भारत में पैराक्वाट खरपतवार नाशक पर लगा प्रतिबंध – भारत सरकार ने कीटनाशी अधिनियम, 1968 के तहत पैराक्वाट डाइक्लोराइड के पंजीकरण पर रोक लगा दी है और इस खरपतवारनाशी के लिए पहले से जारी सभी पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं। इसके साथ ही देश के सबसे विवादित फसल सुरक्षा उत्पादों में से एक की कई महीनों से चल रही नियामक समीक्षा औपचारिक रूप से पूरी हो गई है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने यह आदेश एस.ओ. 5234(ई) के रूप में जारी किया है, जो 22 सितंबर 2026 को दिनांकित है। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम जनता से प्राप्त आपत्तियों और सुझावों, विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों तथा कीटनाशी अधिनियम के तहत गठित पंजीकरण समिति से परामर्श के बाद उठाया गया है। आदेश में सरकार ने कहा है कि वह इस बात से संतुष्ट है कि पैराक्वाट डाइक्लोराइड का उपयोग मनुष्यों और पशुओं के लिए ऐसे जोखिम पैदा करता है, जिनके कारण तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।

पंजीकरण पर रोक आधिकारिक राजपत्र में आदेश के प्रकाशन की तिथि से लागू होगी। कीटनाशी अधिनियम की धारा 9 के तहत जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र भी उसी तिथि से रद्द माने जाएंगे। पंजीकरण समिति को इस उत्पाद के लिए जारी सभी प्रमाणपत्र वापस मंगाने का निर्देश दिया गया है, और प्रमाणपत्र वापस न करने वाले धारकों के खिलाफ अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए अधिनियम और उसके नियमों के तहत आवश्यक कदम उठाएं।

अंतिम आदेश 10 जुलाई 2026 की मसौदा अधिसूचना एस.ओ. 3800(ई) के बाद आया है, जिसमें पूरे भारत में पैराक्वाट डाइक्लोराइड के निर्माण, आयात, परिवहन, वितरण, बिक्री और उपयोग पर रोक का प्रस्ताव था। वह राजपत्र 13 जुलाई 2026 को सार्वजनिक किया गया था, और अंतिम निर्णय से पहले हितधारकों को आपत्तियां या सुझाव देने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था।

इस प्रक्रिया की शुरुआत साल की शुरुआत में हुई थी। मंत्रालय ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड के निरंतर पंजीकरण और उपयोग की जांच के लिए 14 जनवरी 2026 को एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी, जिसने 12 जून 2026 को केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद पंजीकरण समिति ने जून के अंतिम सप्ताह में अपनी 473वीं बैठक में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की समीक्षा की, जिसमें पैराक्वाट के साथ कीटनाशक कार्बोसल्फान की भी जांच हुई, और फिर अपनी सिफारिशें अलग से सरकार को भेजीं।

सुरक्षा से जुड़े तर्क मसौदे में स्पष्ट किए गए थे। पंजीकरण समिति ने बताया कि पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर 70 से अधिक देशों में प्रतिबंध या कड़ी पाबंदी है, और स्वास्थ्य पर दर्ज प्रतिकूल प्रभाव, उच्च मृत्यु दर वाले लगातार विषाक्तता के मामले तथा किसी विशिष्ट प्रतिविष (एंटीडोट) का न होना प्रमुख चिंताएं मानी गईं।

समीक्षा में खेतों में इसके उपयोग के तरीके पर भी ध्यान दिया गया। भारत में पैराक्वाट केवल खरपतवार नियंत्रण के लिए गैर-चयनात्मक संपर्क खरपतवारनाशी के रूप में पंजीकृत है, लेकिन मूंग और सोयाबीन जैसी फसलों को यांत्रिक कटाई से पहले जल्दी सुखाने के लिए इसके डेसिकेंट के रूप में उपयोग के मामले दर्ज हुए हैं, जो स्वीकृत लेबल के दायरे से बाहर है।

सितंबर का आदेश विशेष रूप से नए पंजीकरण पर रोक लगाता है, मौजूदा प्रमाणपत्र रद्द करता है, पंजीकरण समिति को उन्हें वापस लेने का निर्देश देता है और राज्यों से प्रतिबंध लागू करने को कहता है। चूंकि भारत में वैध पंजीकरण के बिना किसी कीटनाशक का वैध रूप से निर्माण, आयात या बिक्री नहीं हो सकती, इसलिए इसका व्यावहारिक असर बाजार से पैराक्वाट उत्पादों के हटने के रूप में सामने आने की उम्मीद है। राजपत्र प्रकाशन उपलब्ध होने के बाद यह देखना अहम होगा कि राज्य वितरण चैनल में पहले से मौजूद स्टॉक से कैसे निपटते हैं।

भारत के कृषि-आदान उद्योग के लिए यह हाल के वर्षों में खरपतवारनाशी से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है। पैराक्वाट का बागानों, बगीचों और कई खेत फसलों में खरपतवार नियंत्रण के लिए व्यापक उपयोग होता रहा है, और इसके बाहर होने से फॉर्मूलेटर, वितरक और किसान वैकल्पिक खरपतवार प्रबंधन समाधानों की ओर बढ़ेंगे। मजबूत वैकल्पिक खरपतवारनाशी पोर्टफोलियो वाली कंपनियों को फायदा हो सकता है, जबकि पैराक्वाट की बिक्री पर निर्भर कंपनियों को जल्द बदलाव करने होंगे।

Share This Article