किसानों की 10.99 करोड़ फार्मर आईडी बनीं, ग्रामीण मजदूरों की हाजिरी में फर्जीवाड़ा रोकेगा NMMS – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: ​विकसित भारत’ विजन के तहत वीबी-जी राम जी योजना के तहत कराए जा रहे ग्रामीण विकास कार्यों की निगरानी मजबूत करने के लिए केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने NMMS का उन्नत फेस ऑथेंटिकेशन वर्जन जारी किया है. इसकी मदद से मजदूरों की हाजिरी में फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों का हक सुरक्षित रहेगा. ​आईआईटी मद्रास की तकनीकी ताकत से NMMS ऐप के नए वर्जन को लैस किया गया है.  केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर में किसानों की 10.99 करोड़ फार्मर आईडी बन गई हैं.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी–जी राम जी (VB-G RAM G) के अंतर्गत श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने हेतु राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) के उन्नत-सुरक्षा संस्करण को जारी किया. केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक ग्रामीण मजदूर को पारदर्शी रूप से रोजगार देना और बिना गड़बड़ी के सरकारी धन का सही उपयोग करना है. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) के तकनीकी सहयोग, एआई आधारित सत्यापन और सुदृढ़ साइबर सुरक्षा से लैस यह नया संस्करण ऐप से छेड़छाड़ और फर्जी हाजिरी पर कड़ा प्रहार करेगा, वहीं नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए ऑफलाइन हाजिरी व मानवीय छूट का भी पुख्ता प्रबंध किया गया है.

​केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 1 जुलाई 2026 से लागू की गई ‘वीबी-जी राम जी’ योजना ग्रामीण कामगारों के लिए आपात स्थिति में भी संबल सिद्ध हो रही है. महज कुछ महीनों के भीतर देशभर की 2.41 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में 31.23 लाख कार्यस्थलों पर काम हुआ है. इसके तहत मांग के अनुरूप 2.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों के 3.65 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार दिया गया है. अब तक लगभग 46 करोड़ मानवदिवस सृजित किए जा चुके हैं, जिनमें से अकेले फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से लगभग 40 करोड़ मानवदिवस दर्ज किए गए हैं. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने इस योजना में 95,692 करोड़ रुपये का बजट दिया है, जो राज्यों के अंश को मिलाकर 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाता है. इसमें से राज्यों और केंद्रीय प्रदेशों को पहली किस्त के रूप में 26,126 करोड़ रुपये की मदर सैंक्शन जारी की जा चुकी है.

​केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूर्व में कार्यस्थलों पर फर्जी हाजिरी और किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर मजदूरी उठाने की शिकायतें आती थीं. इन विसंगतियों को जड़ से समाप्त करने के लिए मार्च 2026 में एनएमएमएस ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरे की पहचान) की व्यवस्था जोड़ी गई थी. इसके अत्यंत सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने कार्यस्थलों पर फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करने में उल्लेखनीय सफलता पाई है.

​केंद्रीय मंत्री ने चेतावनी दी कि सरकार ने जिलों में औचक निरीक्षण के लिए रैंडम जांच टीमें (Spot Inspection Teams) भेजी हैं ताकि धरातल पर जाकर काम की सत्यता परखी जा सके. सोशल ऑडिट और सार्वजनिक प्रकटीकरण (पब्लिक डिस्क्लोजर) की व्यवस्था को पूरी तरह लागू किया गया है. राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध या अनधिकृत ऐप के इस्तेमाल पर कड़ी नजर रखी जाए और ऐसे मामलों में तत्काल डिजिटल साक्ष्य जुटाकर संबंधित कानूनों के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं. उन्होंने दो टूक कहा कि रोजगार हर जरूरतमंद को मिलेगा, लेकिन किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या गड़बड़ी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

​केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने किसानों के हित में चलाई जा रही एक और ऐतिहासिक पहल की बड़ी उपलब्धि साझा की. उन्होंने बताया कि खेती में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाने और किसानों को योजनाओं का सीधा व सुगम लाभ देने के लिए देशव्यापी ‘फार्मर आईडी’ (Farmer ID) अभियान तेजी से चलाया जा रहा है. दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ फार्मर आईडी बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है. समय-सीमा से एक वर्ष से भी अधिक पहले देश में अब तक 10 करोड़ 99 लाख 70 हजार फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं. कहा कि मात्र 30 हजार आईडी बनते ही देश 11 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लेगा, जो भारतीय कृषि और किसानों के जीवन में  क्रांतिकारी बदलाव साबित होगा.

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