उपजाऊ खेतों पर सोलर पैनल लगाने पर लग सकती है रोक, सरकार लाएगी नई नीति.. पैदावार घटने की आशंका – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: गुजरात सरकार राज्य की उपजाऊ कृषि भूमि पर सोलर पैनल लगाने पर रोक लगाने के लिए नीति लाने की तैयारी कर रही है. राज्य के कृषि विभाग की एक स्टडी में सामने आया है कि मध्य गुजरात के चारोतर क्षेत्र में किसान अपनी उपजाऊ जमीन सोलर ऊर्जा कंपनियों को किराये पर दे रहे हैं. इसकी बड़ी वजह खेती की बढ़ती लागत, फसल से होने वाली कमाई में अनिश्चितता और मौसम से होने वाला नुकसान है. सोलर कंपनियों से किसानों को लंबे समय तक तय किराया मिलने की उम्मीद रहती है. हालांकि, अभी कंपनियां हर एकड़ जमीन के लिए सालाना 60,000 से 65,000 रुपये तक किराया दे रही हैं.

कृषि विभाग की स्टडी के मुताबिक, आनंद और वडोदरा जिलों में यह रुझान तेजी से बढ़ रहा है. इन जिलों की जमीन उपजाऊ है. यहां सिंचाई की अच्छी सुविधाएं हैं और किसान एक साल में कई फसलें उगाते हैं. इस वजह से ये इलाके लंबे समय से कृषि उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, कृषि विभाग ने चिंता जताई है कि उपजाऊ कृषि भूमि पर सोलर पैनल लगाने से लंबे समय में राज्य की कृषि उत्पादकता पर बुरा असर पड़ सकता है. इसी को देखते हुए सरकार उपजाऊ जमीन पर सोलर पैनल लगाने को सीमित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. हालांकि, सरकार की ओर से इस नीति को लेकर अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है.

गुजरात में सोलर कंपनियां किसानों की जमीन 30 साल के लिए किराये पर ले रही हैं. इसके बदले कंपनियां हर एकड़ जमीन के लिए सालाना 60,000 से 65,000 रुपये तक किराया दे रही हैं. समझौते के तहत हर साल किराये में 5 फीसदी की बढ़ोतरी भी की जाती है. कुछ समझौतों में किसानों को सोलर प्लांट की देखरेख का काम भी दिया जाता है. इसके लिए उन्हें हर महीने 12,000 रुपये तक वेतन मिलता है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात में उपजाऊ कृषि भूमि पर सोलर पैनल लगाने का असर आने वाले वर्षों में ज्यादा गंभीर हो सकता है. राज्य के कृषि विभाग की एक स्टडी के मुताबिक, खेती की जमीन का इस्तेमाल सोलर परियोजनाओं के लिए करने से उपजाऊ जमीन की उपलब्धता घट सकती है. अगले 1 से 5 साल में इसका असर कुछ स्थानीय क्षेत्रों में दिख सकता है. वहीं, 10 से 30 साल की लंबी अवधि में जमीन की ऊपरी उपजाऊ परत की गुणवत्ता को स्थायी नुकसान पहुंचने की आशंका है.

स्टडी में यह भी चेतावनी दी गई है कि खेती योग्य जमीन लगातार सोलर परियोजनाओं  के लिए इस्तेमाल होती रही, तो अनाज उत्पादन पर असर बढ़ सकता है. शुरुआत में उत्पादन में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन लंबे समय में संबंधित क्षेत्र में अनाज की कमी होने का खतरा है. ऐसी स्थिति में दूसरे क्षेत्रों से अनाज मंगाने पर निर्भरता बढ़ सकती है. गुजरात में खेती की जमीन का इस्तेमाल सोलर परियोजनाओं के लिए बढ़ने से पशुओं के चारे की कमी भी बढ़ सकती है. राज्य के कृषि विभाग की स्टडी के मुताबिक, खेती का रकबा घटने से फसल अवशेष और खेती से मिलने वाले दूसरे उप-उत्पादों की उपलब्धता कम हो सकती है. इनका इस्तेमाल पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है.

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