एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए सरकार ने 12 नई किस्मों की खेती करने को मंजूरी दे दी है. 4 किस्में गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर-लखनऊ में विकसित की गई हैं और 8 किस्में केंद्र की ओर से स्वीकृत की गई हैं, जिन्हें यूपी में खेती के लिए योग्य माना गया है. यह किस्में लाल सड़न रोग से बचने में सक्षम हैं और पूर्व की उन्नत किस्मों से ज्यादा उत्पादन देती हैं. नई किस्मों में शर्करा रिकवरी भी ज्यादा पाई गई है.
शाहजहापुर गन्ना शोध परिषद में गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में गन्ने की 4 नई किस्मों को खेती के लिए मंजूरी दी गई है. इन किस्मों को कोयम्बटूर से संबंधित गन्ना प्रजनन किया गया है और गन्ना शोध परिषद ने शाहजहांपुर और लखनऊ में इनका विकास और परीक्षण किया है. इसलिए इन किस्मों को को.शा. या CO.SH कोड दिया गया है. जबकि, लखनऊ में विकसित किस्म को को.लख या CO.LK किया गया है. ये चारों गन्ना किस्में पूर्व की उन्नत किस्मों से ज्यादा उत्पादन और शर्करा रिकवरी में बेहतर देने में सक्षम पाई गई हैं. इसके साथ ही रोग प्रतिरोधी भी होने से किसानों के लिए इन्हें बेस्ट बताया जा रहा है.
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर में विकसित किस्मों को खेती के लिए सटीक माना गया है. वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कोयंबटूर के गन्ना प्रजनन को शाहजहांपुर और लखनऊ केंद्रों में विकसित करने के साथ ही कई साल तक परीक्षण किया गया है. नतीजे बेहद संतोषजनक रहे हैं, जिसके चलते इन किस्मों को पूरे उत्तर प्रदेश में खेती के लिए जारी किया गया है.
गन्ना की नई किस्म को.शा.23232 अगेती फसल के लिए बेस्ट वैरायटी है. इसकी औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर पाई गई है, जो लोकप्रिय उन्नत किस्म CO0238 से 9.44 फीसदी ज्यादा है. इसकी पेड़ी की उपज भी 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो CO.0238 से 3.16 फीसदी अधिक है. यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी बताई गई है और इसकी पेड़ी भी अच्छी होती है. वहीं, को.लख.21201 किस्म की औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर है और इसमें चीनी की मात्रा को.0238 से अधिक पाई गई है. यह किस्म भी लाल सड़न रोग के प्रति काफी मजबूत है.
गन्ना की नई किस्म को.शा.19235 और को.शा.18232 मध्य और देर से पकने वाली किस्में हैं. को.शा.19235 किस्म की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो मानक किस्म को.शा.767 से 21.01 फीसदी अधिक है. इसकी पेड़ी की उपज भी 73.90 टन प्रति हेक्टेयर रही है. इसी तरह को.शा.18232 की औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.शा.767 से 26.51 फीसदी अधिक है. इसकी पेड़ी की उपज 82.06 टन प्रति हेक्टेयर रही, यानी मानक किस्म से 23.70 फीसदी ज्यादा है. यह दोनों किस्में रोग से लड़ने में सक्षम हैं.
भारत सरकार की ओर से नोटिफाइड 8 गन्ना किस्मों को भी उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अपनाया गया है. इनमें को.पी.16437, को.पी.11438 और को.लख.16466 अगेती किस्में हैं. जबकि, को.16030, को.17018, को.18022, को.पीबी.17215 और को.पीबी.18213 मध्य एवं देर से पकने वाली किस्में हैं.
गन्ना परिषद ने कहा है कि नई किस्मों के आने से किसानों को गन्ने की खेती के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे. अधिक उपज और बेहतर चीनी परता वाली किस्मों से किसानों की पैदावार और आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है. साथ ही गन्ने में चीनी की मात्रा बढ़ने से चीनी मिलों और पूरे चीनी उद्योग को भी फायदा होगा.