एग्रीवेट: धान की फसल में बालियां निकलने और दाना भरने के समय किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. इस दौरान धान में फाल्स स्मट यानी हल्दी रोग का प्रकोप फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. इस रोग में धान की बालियों में दानों की जगह गांठ जैसी संरचना बनने लगती है, जो बाद में पीले रंग के पाउडर में बदल जाती है. इससे धान की गुणवत्ता और दानों के विकास पर असर पड़ सकता है. ऐसे में किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, समय पर रोग की पहचान, संक्रमित बालियों को सावधानी से हटाने और सही फफूंदनाशक के इस्तेमाल से नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है.
धान की बालियों में गांठ जैसी संरचना दिखाई देना फाल्स स्मट या हल्दी रोग का प्रमुख लक्षण हो सकता है. शुरुआत में ये गांठें हरे-काले या गहरे रंग की दिखाई दे सकती हैं. बाद में इनका रंग बदलकर पीला या हल्दी जैसा हो जाता है. संक्रमित गांठ को छूने पर यह पाउडर जैसी बनावट में टूट सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को खासकर बालियां निकलने और दाना भरने के समय फसल पर नजर रखनी चाहिए. अगर किसी बाली में असामान्य गांठ या पीले रंग का पाउडर दिखाई दे, तो उसे सामान्य दाना समझकर नजरअंदाज न करें. समय पर पहचान होने से रोग के प्रबंधन में मदद मिल सकती है.
धान में फाल्स स्मट रोग का प्रकोप बढ़ने के पीछे मौसम और खेती का तरीका भी अहम भूमिका निभा सकता है. वातावरण में अधिक नमी, रुक-रुककर होने वाली बारिश और अनुकूल तापमान जैसी परिस्थितियां रोग के विकास के लिए अनुकूल हो सकती हैं. इसके अलावा, खेत में जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का इस्तेमाल भी रोग का खतरा बढ़ा सकता है. ऐसे में किसानों को संतुलित मात्रा में खाद का इस्तेमाल करना चाहिए. धान की फसल में उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी की जरूरत और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें. खेत में पानी और नमी की स्थिति पर भी ध्यान दें. नियमित निरीक्षण से शुरुआती लक्षणों को पहचानने में आसानी होती है.
अगर धान की किसी बाली में हल्दी रोग के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे हटाते समय सावधानी बरतना जरूरी है. संक्रमित गांठ को हाथ से मसलने या जोर से झटकने से उसके बीजाणु आसपास फैल सकते हैं. इससे अन्य पौधों तक संक्रमण पहुंचने का जोखिम बढ़ सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, संक्रमित बाली को सावधानीपूर्वक प्लास्टिक की थैली में डालकर खेत से बाहर निकालें और सुरक्षित तरीके से नष्ट करें. इस दौरान गांठ को फोड़ने या पाउडर को फैलने से बचाएं. साथ ही, खेत के बाकी हिस्सों का निरीक्षण करें, ताकि दूसरी संक्रमित बालियों का भी समय पर पता लगाया जा सके.
फाल्स स्मट रोग के प्रबंधन के लिए प्रोपिकोनाजोल 25% EC और हेक्साकोनाजोल जैसे फफूंदनाशकों का इस्तेमाल कुछ परिस्थितियों में किया जाता है. हालांकि, सही दवा, उसकी मात्रा और छिड़काव का समय रोग की स्थिति और उत्पाद के लेबल पर निर्भर करता है. इसलिए किसान बिना पुष्टि के किसी भी दवा का छिड़काव न करें. कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही उचित फफूंदनाशक का चुनाव करें और लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें. दवा का छिड़काव करते समय सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल भी जरूरी है.