दालों की महंगाई से बढ़ी राज्यों की चिंता, केंद्र से तूर-चना की मांग.. बफर स्टॉक बचाने में जुटी सरकार – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: दालों की बढ़ती कीमतों के बीच कई राज्य सरकारों ने केंद्र से तूर और चना दाल की मांग की है. हालांकि, केंद्र सरकार अपना बफर स्टॉक सुरक्षित रखना चाहती है, ताकि जरूरत पड़ने पर बाजार में दालों की सप्लाई बढ़ाकर खुदरा कीमतों को नियंत्रित किया जा सके. सरकार फिलहाल राज्यों की कल्याणकारी योजनाओं के लिए अपना पूरा स्टॉक देने के बजाय बाजार में दालों की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दे रही है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण भारत के बड़े राज्यों ने एक-एक लाख टन से ज्यादा तूर दाल की मांग  की है. केंद्र का कहना है कि भविष्य की जरूरतों के लिए पर्याप्त स्टॉक बचाए रखते हुए इतनी बड़ी मांग पूरी करना मुश्किल होगा. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के पास फिलहाल करीब 45 लाख टन दालों का बफर स्टॉक है. इसमें सबसे ज्यादा 23 लाख टन चना है. इसके अलावा 11 लाख टन तूर दाल, 6.5 लाख टन मसूर, 3.7 लाख टन मूंग और 70 हजार टन उड़द का स्टॉक मौजूद है. सरकार इस भंडार का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर बाजार में दालों की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए करना चाहती है.

देश में दालों की खुदरा कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को तूर दाल की औसत खुदरा कीमत एक साल पहले के मुकाबले 17.2 फीसदी बढ़कर 131.98 रुपये प्रति किलो पहुंच गई. वहीं, चना दाल 8.66 फीसदी महंगी होकर 92.86 रुपये प्रति किलो हो गई. उड़द दाल की कीमत 10.56 फीसदी बढ़कर 125.45 रुपये और मूंग दाल की कीमत 4.77 फीसदी बढ़कर 114.11 रुपये प्रति किलो रही.

दालों की कीमतों में तेजी के बीच कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति ने घरेलू उत्पादन  को लेकर चिंता बढ़ा दी है. दाल उगाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में बारिश की कमी से तूर दाल की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है. वहीं, मिट्टी में नमी कम होने से आगामी रबी सीजन में चने की बुवाई पर भी असर पड़ सकता है. तूर खरीफ सीजन की फसल है, इसलिए इसकी पैदावार पर मॉनसून की बारिश का काफी असर पड़ता है. दूसरी ओर, चना रबी सीजन की प्रमुख फसल है और इसकी बुवाई का समय शुरू हो रहा है. तूर और चना देश में खपत होने वाली कुल दालों में 60 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी रखते हैं.

दालों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार पहले से ही कदम उठा रही है. जुलाई में सरकार ने कृषि मंत्रालय से मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत खरीदी गई दालों के निपटान से जुड़े नियमों में ढील देने को कहा था. मौजूदा नियम के तहत सरकार को खरीदी गई दालों का निपटान नौ महीने के भीतर करना होता है. सरकार इस नियम में बदलाव की संभावना पर विचार कर रही है, ताकि जरूरत के मुताबिक दालों के स्टॉक का इस्तेमाल किया जा सके.

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