एग्रीवेट: दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए शुरू किए गए मिशन के पहले साल में एक भी रिसर्च प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली है. इस मिशन के तहत 2025-26 से 2030-31 तक छह साल में 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं. इस देरी को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने प्रक्रिया में तेजी लाने की बात कही है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, समिति की सिफारिशों के आधार पर योग्य रिसर्च प्रोजेक्ट को अक्टूबर 2026 के अंत तक मंजूरी मिलने की उम्मीद है. इससे पहले कैबिनेट सचिवालय ने मंत्रालय को 15 नवंबर तक सभी जरूरी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था. मंत्रालय का कहना है कि वह तय समयसीमा से पहले ही प्रोजेक्ट को मंजूरी देने की कोशिश कर रहा है.
दरअसल, 5 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में हुई बैठक में कृषि अनुसंधान से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की गई थी. इस दौरान तिलहन, दालों और कपास के क्षेत्र में कृषि अनुसंधान को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई. इसी बैठक में रिसर्च प्रोजेक्ट को मंजूरी देने में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया गया. बैठक सेवा तीर्थ में हुई, जिसमें कृषि सचिव अतिश चंद्र, पर्यावरण सचिव नरेंद्र भूषण और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव मंगी लाल जाट समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
बैठक में कैबिनेट सचिवालय के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय दलहन मिशन के तहत रिसर्च प्रोजेक्ट के प्रस्तावों को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से अब तक मंजूरी नहीं मिली है. अधिकारियों ने कृषि मंत्रालय से कहा कि मिशन के लिए आवंटित 500 करोड़ रुपये के तहत रिसर्च प्रोजेक्ट को मंजूरी देने की प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक पूरी की जाए. भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है. इसके बावजूद देश में दालों का उत्पादन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है. इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले साल दलहन मिशन शुरू किया था. मिशन के दूसरे काम आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन रिसर्च प्रोजेक्ट को अब तक मंजूरी नहीं मिली है.
कृषि मंत्रालय के मुताबिक, दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए रिसर्च के प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करने के बाद देशभर के शोध संस्थानों और अन्य योग्य संस्थाओं से प्रस्ताव मांगे गए थे. इसके तहत कुल 419 प्रस्ताव मिले हैं. इन सभी प्रस्तावों की शुरुआती जांच और तकनीकी मूल्यांकन किया जा रहा है. मंत्रालय के अनुसार, मिले प्रस्तावों में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थानों से 125, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों से 249 और अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों, संस्थानों व सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से 14 प्रस्ताव शामिल हैं. इसके अलावा, निजी विश्वविद्यालयों से 5 प्रस्ताव मिले हैं.
कृषि मंत्रालय के मुताबिक, एक स्क्रीनिंग कमेटी ने रिसर्च के प्राथमिक क्षेत्रों और मिशन के उद्देश्यों के आधार पर सभी प्रस्तावों की जांच की है. इसके बाद कुछ प्रोजेक्ट को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना गया है. अब शोधकर्ता राष्ट्रीय स्तर की रिसर्च एंड डेवलपमेंट कमेटी के सामने अपने प्रस्ताव पेश कर रहे हैं.इस कमेटी में अतिरिक्त सचिव, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक, मिशन से जुड़े अधिकारी और संबंधित विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं. कमेटी यह देख रही है कि प्रस्ताव वैज्ञानिक रूप से कितना मजबूत है, किसानों के लिए कितना उपयोगी होगा और उसे खेतों में लागू करने से क्या फायदा मिलेगा. साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि कहीं उसी विषय पर पहले से कोई रिसर्च तो नहीं हो रही है. मंत्रालय ने बताया कि पिछली तीन बैठकों में कई प्रस्तावों को मंजूरी के लिए शॉर्टलिस्ट किया जा चुका हैय