एग्रीवेट: Balcony Gardening: घर की छत, बालकनी या गार्डन में सब्जियां उगाने के बाद अगर उनका आकार छोटा रह जाता है और वे कुछ समय बाद सड़ने लगती हैं, तो इसकी एक बड़ी वजह सही परागण न होना हो सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, खीरा, लौकी, तोरई और कद्दू जैसी फसलों में फल बनने और उसके विकास के लिए परागण बेहद जरूरी है. मधुमक्खियों की कमी होने पर किसान या बागवानी करने वाले लोग हाथ से भी परागण कर सकते हैं.
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, फूलों में परागण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही फल और बीज बनने की शुरुआत होती है. इसमें फूल के नर भाग से परागकण मादा भाग तक पहुंचते हैं. प्राकृतिक रूप से यह काम मधुमक्खियां और दूसरे परागण करने वाले कीट करते हैं. जब मधुमक्खियां फूलों पर बैठकर रस लेती हैं, तो उनके शरीर पर लगे परागकण दूसरे फूलों तक पहुंच जाते हैं. खीरा, लौकी, तोरई, कद्दू, तरबूज और खरबूजा जैसी फसलों में यह प्रक्रिया खास तौर पर महत्वपूर्ण होती है. पर्याप्त परागण नहीं होने पर फल का विकास रुक सकता है और वह छोटा रहकर खराब भी हो सकता है.