एग्रीवेट: देश में इस साल मॉनसून कमजोर रहने की आशंका बढ़ गई है. जून से सितंबर के बीच अब तक देश में सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश हुई है. अगर बारिश की यह कमी आगे भी बनी रहती है, तो 2026 का मॉनसून 2009 के बाद सबसे कमजोर हो सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 2009 में मॉनसून के दौरान सामान्य से 18 फीसदी कम बारिश हुई थी. इस साल भी बारिश की कमी इसी स्तर के करीब पहुंच रही है. कम बारिश का असर खरीफ फसलों की पैदावार पर पड़ सकता है. इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने के साथ खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने का खतरा है.
खास बात यह है कि IMD ने मई में इस सीजन में सामान्य से करीब 10 फीसदी कम बारिश होने का अनुमान जताया था. लेकिन अब तक बारिश की कमी अनुमान से ज्यादा बनी हुई है. मौसम में इस कमजोरी की एक बड़ी वजह अल नीनो (El Niño) का मजबूत होना बताया जा रहा है. इसके चलते देश में बारिश पर असर पड़ने की आशंका है.
बंगाल की खाड़ी में बन सकता है चक्रवात
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की मौसम परामर्श कंपनी ग्लोबल वेदर क्लाइमेट एनालिटिक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिश्चियन वर्नर का कहना है कि सितंबर के आखिरी हफ्ते में बंगाल की खाड़ी में उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं. उन्होंने कहा कि अगर चक्रवात बनता है तो इससे पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है. इससे इन क्षेत्रों में बारिश की कमी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है.
10 से 20 फीसदी कम बारिश की संभावना
हालांकि, वर्नर के मुताबिक इस मौसम प्रणाली से देशभर में मॉनसून की तस्वीर में बड़ा बदलाव आने की संभावना कम है. उनका अनुमान है कि मॉनसून सीजन के अंत तक बारिश की कमी 13 से 16 फीसदी के बीच रह सकती है. ब्रिटेन की लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी के CRUCIAL नामक मौसम पूर्वानुमान प्लेटफॉर्म पर भी मॉनसून को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं. इसके संस्थापक और प्लैनेटरी साइंटिस्ट मार्क रॉल्स्टन के मुताबिक, मॉनसून खत्म होने में दो हफ्ते से भी कम समय बचा है. प्लेटफॉर्म के अनुसार, इस साल मॉनसून के अंत में बारिश सामान्य से 10 से 20 फीसदी कम रहने की संभावना 68 फीसदी है.
खाद्य महंगाई पर बढ़ सकता है दबाव
भारत में मॉनसून की बारिश खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. देश के करोड़ों किसान सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर हैं. भारत चावल, चीनी और कपास के बड़े उत्पादकों में शामिल है और सालभर होने वाली कुल बारिश का ज्यादातर हिस्सा मॉनसून के दौरान ही मिलता है. इस साल लंबे समय से बारिश की कमी बनी हुई है. इसका असर मौजूदा खरीफ फसल के साथ अगली फसल पर भी पड़ सकता है. वहीं, खाद्य महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है. अगस्त में खाद्य महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़कर 5.95 फीसदी पर पहुंच गई, जो इस साल का सबसे ऊंचा स्तर है.
कम बारिश का असर फसलों की बुवाई पर भी दिख रहा है. धान, गन्ने और मक्का की बुवाई पिछले सीजन की तुलना में पीछे चल रही है. अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है और आने वाले महीनों में खाद्य कीमतें और बढ़ सकती हैं.