एग्रीवेट: Women Farmer Success Story: महिला किसान दिवस के इस खास मौके पर आज हम आपको एक ऐसी महिला किसान की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से खेती की एक नई मिसाल पेश की है. मिजोरम की जेड.टी. लालरिथांगी ने महज 1,000 स्ट्रॉबेरी के पौधों से अपना सफर शुरू किया था. धीरे-धीरे उन्होंने खेती के नए तरीके अपनाए और आज उनके खेत में 40,000 से ज्यादा स्ट्रॉबेरी के पौधे हैं. लेकिन उनकी कहानी सिर्फ खेती बढ़ाने तक सीमित नहीं है. उन्होंने स्ट्रॉबेरी से जूस बनाना शुरू किया, मछली और मुर्गी पालन को भी अपनाया. इसी मेहनत की वजह से संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की ‘100 वीमेन हीरोज’ लिस्ट में भी उनका नाम शामिल है.
जेड.टी. लालरिथांगी का सफर बताता है कि, खेती में नई तकनीक और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो छोटे स्तर से भी अच्छी शुरुआत की जा सकती है. उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की, लेकिन आगे बढ़ने के लिए उन्हें खेती के पुराने तरीकों में बदलाव की जरूरत महसूस हुई. इसके बाद उन्होंने मिजोरम के लॉन्गतलाई स्थित बागवानी विभाग से संपर्क किया. यहां से उन्हें खेती को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी मदद और मार्गदर्शन मिला.
बागवानी विभाग की मदद से लालरिथांगी ने खेती में प्लास्टिक मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई और बारिश के पानी को जमा करने के लिए टंकी जैसे तरीके अपनाए. इनसे उन्हें स्ट्रॉबेरी की खेती को आगे बढ़ाने में मदद मिली. जो काम पहले 1,000 पौधों से शुरू हुआ था, वह अब बढ़कर 40,000 से ज्यादा पौधों तक पहुंच गया है.
उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि खेती में सिर्फ मेहनत करना ही काफी नहीं है. पानी का सही इस्तेमाल, फसल की देखभाल और नई तकनीकों को अपनाना भी उतना ही जरूरी है. खासकर उन इलाकों में, जहां पानी की उपलब्धता और खेती से जुड़ी दूसरी चुनौतियां किसानों के सामने रहती हैं.
उन्होंने स्ट्रॉबेरी की बर्बादी कम करने और उससे ज्यादा कमाई करने के लिए उसकी प्रोसेसिंग पर भी ध्यान दिया. इसके तहत उन्होंने स्ट्रॉबेरी का जूस बनाना शुरू किया. यानी फल को केवल ताजा बेचने के बजाय उससे दूसरी चीज तैयार करके भी आमदनी बढ़ाने की कोशिश की. किसानों के लिए यह एक अहम सीख है कि फसल बेचने के साथ-साथ उससे नए उत्पाद तैयार करना भी कमाई का जरिया बन सकता है.
लालरिथांगी का लक्ष्य सिर्फ अपने खेत को आगे बढ़ाना नहीं है. वह अपने काम के जरिए ग्रामीण युवाओं, खासकर युवा महिलाओं के लिए रोजगार के मौके पैदा करने की भी कोशिश कर रही हैं. खेती और उससे जुड़े कामों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की उनकी यह पहल गांव में रोजगार के नए रास्ते खोल सकती है.
एफएओ की ‘100 वीमेन हीरोज’ सूची में जगह मिलना उनके लिए सम्मान की बात है. मिजोरम से शुरू हुआ उनका सफर आज वैश्विक पहचान तक पहुंच गया है. उनकी कहानी देश की उन महिला किसानों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेती में कुछ नया करना चाहती हैं. लालरिथांगी ने दिखाया है कि सही जानकारी, तकनीक और लगातार मेहनत से खेती को आगे बढ़ाने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी अवसर तैयार किए जा सकते हैं.