एग्रीवेट: Success Story: खेती में अच्छी कमाई के लिए जरूरी नहीं कि किसान केमिकल वाली खाद और दवाओं पर ज्यादा पैसा खर्च करें. सही तरीके से बागवानी की जाए, पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिले और खेती में प्राकृतिक तरीकों को अपनाया जाए, तो बेहतर नतीजे मिल सकते हैं. बिहार के सारण जिले के किसान श्री नरवदेश्वर गिरी की मौसंबी की खेती इसी की एक मिसाल है. प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनके बाग में मौसंबी का उत्पादन काफी बढ़ा है. जहां पहले एक पेड़ से करीब 10 से 15 किलो मौसंबी मिलती थी, वहीं अब उत्पादन बढ़कर 40 से 50 किलो प्रति पेड़ तक पहुंच गया है.
बिहार के सारण जिले में रहने वाले किसान नरवदेश्वर गिरी मौसंबी की खेती करते हैं. उन्होंने अपने बाग में मौसंबी की न्यू सेलर और बिग वन किस्में लगाई हैं. उनकी खेती की खास बात पौधों को सही दूरी पर लगाना और प्राकृतिक खेती के तरीके अपनाना है. बाग में पौधों के बीच 10 फीट और एक कतार से दूसरी कतार के बीच 12 फीट की दूरी रखी गई है. इससे पेड़ों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है. बाग की सही बनावट और देखभाल से पौधों के विकास और फल उत्पादन में मदद मिल सकती है.
नरवदेश्वर गिरी के बाग में पहले एक पेड़ से करीब 10 से 15 किलो मौसंबी का उत्पादन होता था. अब यह बढ़कर 40 से 50 किलो प्रति पेड़ तक पहुंच गया है. यानी पहले के मुकाबले एक पेड़ से मिलने वाले फलों की मात्रा काफी बढ़ी है. अगर पहले और अब के उत्पादन की तुलना करें, तो एक पेड़ से मिलने वाले फलों की मात्रा करीब तीन से चार गुना तक हो गई है.
इस सफलता की कहानी में प्राकृतिक खेती को खास तौर पर सामने रखा गया है. प्राकृतिक तरीकों से खेती करने का मकसद मिट्टी की सेहत बनाए रखना और खेती में इस्तेमाल होने वाले बाहरी साधनों पर निर्भरता को कम करना है. हालांकि, केवल प्राकृतिक खेती अपनाने से ही उत्पादन बढ़े, यह जरूरी नहीं है. पौधों की सही दूरी, खाद-पानी का संतुलन, समय पर देखभाल और कीट-रोगों पर नजर रखना भी जरूरी होता है. मौसंबी जैसे फलदार पौधों में बाग लगाने से पहले किस्म का चुनाव और पौधों के बीच सही दूरी तय करना आगे चलकर फसल की देखभाल को आसान बना सकता है.
नरवदेश्वर गिरी की कहानी से दूसरे किसान यह सीख सकते हैं कि बागवानी में केवल पौधे लगा देना काफी नहीं है. पौधों को पर्याप्त जगह देना, मिट्टी की स्थिति के अनुसार पोषण का इंतजाम करना और बाग की नियमित देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है. जो किसान मौसंबी की खेती शुरू करना चाहते हैं, उन्हें अपने इलाके की जलवायु और मिट्टी के हिसाब से किस्म चुननी चाहिए. साथ ही, पौधे लगाने की दूरी, सिंचाई और खाद के बारे में स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या बागवानी विभाग से सलाह लेनी चाहिए.