देशभर से दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून की विदाई, दक्षिण भारत में बारिश की एंट्री.. किसानों के लिए क्या है अपडेट? – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Monsoon 2026: देशभर में बारिश का इंतजार अब अगले दौर में पहुंच गया है. जून से सितंबर तक खेतों को पानी देने वाला दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून अब पूरी तरह से देश से विदा हो चुका है. इसी के साथ दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मॉनसून ने दस्तक दे दी है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इससे तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और केरल के कई हिस्सों में बारिश शुरू हो गई है. अगले कुछ दिनों में दक्षिण भारत के कई इलाकों में तेज बारिश होने की भी संभावना है.

इस बार मॉनसून की विदाई सामान्य तारीख यानी 15 अक्टूबर को ही पूरी हुई. हालांकि, इसकी वापसी की शुरुआत 19 सितंबर से शुरू हो गई थी. पिछले साल पूरे देश से मॉनसून 16 अक्टूबर तक विदा हुआ था. अब दक्षिण भारत के किसानों और आम लोगों की नजर उत्तर-पूर्वी मॉनसून की बारिश पर है, क्योंकि इस साल दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून के दौरान कई राज्यों में बारिश की कमी रही.

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पूर्वी मॉनसून की शुरुआत के साथ दक्षिण भारत के कई हिस्सों में 21 अक्टूबर तक बारिश का दौर जारी रह सकता है. कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है. इसका असर तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और केरल में देखने को मिल सकता है.

दक्षिण भारत के लिए उत्तर-पूर्वी मॉनसून को काफी अहम माना जाता है. जहां देश के ज्यादातर हिस्सों में जून से सितंबर के बीच बारिश होती है, वहीं दक्षिण भारत के कई इलाकों में अक्टूबर से दिसंबर के बीच होने वाली बारिश भी पानी की जरूरत पूरी करती है. इसी वजह से इस मौसम की बारिश खेती, जलाशयों और पीने के पानी के लिहाज से महत्वपूर्ण है.

दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय इलाकों में सालभर होने वाली कुल बारिश का करीब 30 फीसदी हिस्सा उत्तर-पूर्वी मॉनसून से मिलता है. तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के लिए यह मौसम और भी खास है. यहां सालभर की करीब 48 फीसदी बारिश अक्टूबर से दिसंबर के बीच ही होती है. यही वजह है कि, इन इलाकों में उत्तर-पूर्वी मॉनसून की बारिश का सीधा असर खेती और पानी की उपलब्धता पर पड़ता है. अगर बारिश सामान्य रहती है, तो किसानों को खेतों के लिए पानी मिल सकता है और जलाशयों में भी पानी का स्तर सुधर सकता है.

इस बार दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून के दौरान देशभर में सामान्य से करीब 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, साल 2001 के बाद यह चौथी सबसे कम बारिश वाला मॉनसून सीजन रहा, जबकि 1901 के बाद यह 13वां सबसे कम बारिश वाला सीजन था. दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश की कमी और ज्यादा रही. कर्नाटक में सामान्य से 30 फीसदी कम, केरल में 28 फीसदी कम, आंध्र प्रदेश में 25 फीसदी कम और तमिलनाडु में 20 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. बारिश की इस कमी से खेती और पानी के इंतजाम पर दबाव बढ़ सकता है.

दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मॉनसून के सामान्य रहने का अनुमान जताया गया है. ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि बारिश की कमी से पैदा हुई परेशानी कुछ कम हो सकती है. खासकर उन इलाकों में इसका फायदा मिल सकता है, जहां खेती और जलाशयों की जरूरत के लिए बारिश अहम है.

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