एग्रीवेट: IISR वरदा अदरक की फसल करीब 150 से 180 दिनों में तैयार हो जाती है. सही समय पर फसल तैयार होने से किसान समय पर खुदाई कर अगली फसल की तैयारी कर सकते हैं.
अच्छी देखभाल और सही खेती तकनीक अपनाने पर इस किस्म से करीब 1,800 से 2,000 किलो प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिल सकता है. इससे किसानों को कम समय में अच्छी पैदावार लेने का मौका मिलता है.
IISR वरदा किस्म में कुछ प्रमुख रोगों के प्रति अच्छी सहनशीलता बताई जाती है. इससे फसल को रोगों से होने वाले नुकसान को कम करने और उत्पादन बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
इस किस्म की अदरक की क्वालिटी अच्छी बताई जाती है. इसका रंग, स्वाद और तेल की मात्रा बेहतर होने के कारण बाजार में इसकी मांग और अच्छा भाव मिलने की संभावना रहती है.
अच्छी पैदावार के साथ बेहतर क्वालिटी मिलने पर किसान को बाजार में अच्छा भाव मिल सकता है. ऐसे में अदरक की खेती से होने वाली आमदनी बढ़ाने का मौका भी बन सकता है.
IISR वरदा कम समय में तैयार होने और अच्छी पैदावार देने वाली किस्म है. अदरक की खेती करने वाले किसान अपने इलाके और बाजार की जरूरत के हिसाब से इसे एक विकल्प के तौर पर अपना सकते हैं.