एग्रीवेट: महाराष्ट्र के नासिक में करीब एक महीने तक ऊंचे रहने के बाद प्याज के थोक भाव अब नरम पड़ने लगे हैं. कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से नई फसल की आवक बढ़ने से देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में कीमतों पर दबाव कम हुआ है. APMC अधिकारियों के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत में अच्छी क्वालिटी का प्याज करीब 55 रुपये किलो बिक रहा था. अब इसका भाव घटकर करीब 46 रुपये किलो रह गया है. वहीं, कम गुणवत्ता वाले प्याज का भाव भी 45 रुपये से घटकर करीब 35 रुपये किलो हो गया है. यानी इसकी कीमत में करीब 10 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है.
लासलगांव APMC के निदेशक प्रवीण कदम ने हिन्दुस्तान टाइम्स को कहा कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से प्याज की आवक बढ़ने के कारण कीमतों पर दबाव आया है. कर्नाटक की मंडियों में फिलहाल प्याज 35 से 51 रुपये किलो के बीच बिक रहा है. भाव गुणवत्ता के हिसाब से अलग-अलग हैं. हालांकि, नासिक के प्याज की होटल उद्योग में मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है. कदम के मुताबिक, होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के मुकाबले नासिक के प्याज की मांग ज्यादा है. उन्होंने कहा कि इस मजबूत मांग को देखते हुए लासलगांव में थोक भाव में आगे बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है.
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में खरीफ प्याज की कटाई अगस्त के आखिर में शुरू हो गई थी. अब इन राज्यों से नई फसल की आवक बढ़ने का असर प्याज की कीमतों पर दिखने लगा है. नासिक के प्याज निर्यातक विकास सिंह ने कहा कि फिलहाल कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के प्याज की निर्यात मांग नासिक के प्याज से ज्यादा है. विदेशी खरीदार इन दोनों राज्यों की नई फसल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों का प्याज नया होने के कारण विदेशी खरीदार इसे खरीदने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, मिस्र से भी प्याज का आयात हुआ है. इससे लासलगांव मंडी में थोक भाव पर दबाव बढ़ा है. व्यापारियों के अनुसार, लासलगांव में रोजाना करीब 6,000 क्विंटल प्याज की आवक हो रही है. उनका मानना है कि जिन किसानों ने ज्यादा भाव की उम्मीद में प्याज रोककर रखा था, वे अब कीमतों में और गिरावट की आशंका से अपनी उपज बाजार में ला सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो मंडी में प्याज की आवक और बढ़ सकती है, जिससे थोक भाव पर दबाव और बढ़ने की संभावना है.
प्याज के थोक भाव में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में अच्छी क्वालिटी का प्याज अभी भी करीब 65 रुपये किलो बिक रहा है. थोक और खुदरा कीमतों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है. लासलगांव APMC के निदेशक प्रवीण कदम के मुताबिक, इसकी एक वजह खुदरा स्तर पर प्याज की बर्बादी भी है. कारोबारियों को खुदरा बिक्री के लिए खरीदे गए प्याज में से करीब 20-30 फीसदी प्याज खराब होने से नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि प्याज खराब होने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कारोबारियों को इसे उचित कीमत पर बेचना जरूरी होता है. यही वजह है कि थोक भाव में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में प्याज की कीमत अभी ऊंची बनी हुई है.