Nana Patekar: स्टारडम से दूर खेतों की मिट्टी से जुड़ा था नाता, फसल के दाम बढ़ाने और किसानों के लिए हमेशा खड़े रहे – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: नाना पाटेकर का किसानों से जुड़ाव सिर्फ बातों तक सीमित नहीं था. पुणे के पास खड़कवासला गांव में उनका करीब 27 एकड़ का फार्म हाउस था, जहां वे समय मिलने पर खेती करते थे. इस खेत में गेहूं, चना और धान जैसी फसलें उगाई जाती थीं. यानी फिल्मों की चमक-दमक से दूर उनका एक ऐसा जीवन भी था, जहां वे मिट्टी और खेती से जुड़े रहते थे.

नाना पाटेकर के लिए खेती सिर्फ शौक नहीं थी. खेत में तैयार होने वाली फसल को बेचने के बाद जो कमाई होती थी, उसे जरूरतमंद किसानों की मदद में लगाया जाता था. बताया जाता है कि इसकी शुरुआत उन्होंने अपने फार्म हाउस पर काम करने वाले लोगों की मदद से की थी.

किसानों के कर्ज, फसल खराब होने और आत्महत्या जैसे मुद्दे नाना पाटेकर को काफी परेशान करते थे. एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि, वे 1.5 करोड़ रुपये की कार खरीदने वाले थे और इसके लिए पैसे भी जुटा लिए थे. लेकिन उसी दौरान टीवी पर किसान आत्महत्या की खबरें देखकर उन्होंने कार खरीदने का फैसला बदल दिया और किसानों की मदद के लिए निकल पड़े.

नाना पाटेकर किसानों की मुश्किलों पर खुलकर बोलते थे. वे फसल के नुकसान, किसानों की आर्थिक तंगी और आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों को लोगों के सामने रखते थे. किसानों की हालत के बारे में बात करते हुए वे कई बार भावुक भी नजर आए. उनका मानना था कि किसानों की परेशानी सिर्फ आर्थिक मदद से नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं को समझने और आवाज उठाने से भी जुड़ी है.

साथ ही नाना पाटेकर ने सूखा प्रभावित मराठवाड़ा में किसानों की मदद के लिए भी काम किया. उन्होंने करीब 500 आत्महत्या करने वाले किसानों की पत्नियों को ‘आरोग्य कार्ड’ देने का विचार रखा था, ताकि वे छत्रपति संभाजीनगर के महात्मा गांधी अस्पताल में मुफ्त इलाज करा सकें. इसके लिए उन्होंने 2016 में मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर NAAM फाउंडेशन शुरू किया था.

किसानों के लिए काम को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए नाना पाटेकर ने 2015 में NAAM Foundation की शुरुआत की. इसके जरिए महाराष्ट्र में सूखे, पानी की कमी, कर्ज और आर्थिक तंगी से परेशान किसानों और ग्रामीण परिवारों की मदद की गई. किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों के साथ-साथ जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में भी आर्थिक सहायता दी जाती थी.

नाना पाटेकर की मदद सिर्फ पैसे देने तक सीमित नहीं रही. किसान आत्महत्या में पति या परिवार के सदस्य को खो चुकी महिलाओं को सिलाई मशीनें देने जैसी मदद भी की गई, ताकि वे खुद कमाई शुरू कर सकें. साथ ही उन्होंने लातूर में करीब 62 परिवारों को 15,000 रुपये प्रति परिवार की आर्थिक मदद भी दी है. इस तरह खेती से शुरू हुआ उनका किसानों से रिश्ता जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने तक पहुंचा.

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