एग्रीवेट: अक्टूबर से नवंबर की शुरुआत तक गाजर की बुवाई करना अच्छा माना जाता है. सही समय पर बुवाई करने से किसान सर्दियों में तैयार फसल को बाजार तक पहुंचा सकते हैं.
सही किस्म, मौसम और खेती के तरीके के साथ गाजर की फसल करीब 80 से 85 दिनों में तैयार हो जाती है. कम समय में तैयार होने वाली फसल किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है.
अगर किसान नवंबर की शुरुआत तक गाजर की बुवाई कर रहे हैं, तो पूसा असिता, पूसा नैनतेश और इम्प्रेटर जैसी किस्में लगा सकते हैं. ये किस्में कम तापमान में भी अच्छी बढ़वार के लिए जानी जाती हैं.
गाजर की बुवाई से पहले बीज का उपचार करना जरूरी है. रासायनिक तरीके से एक किलो बीज को 2.5 ग्राम थायराम से उपचारित किया जा सकता है. वहीं देसी तरीके में पांच लीटर गौमूत्र में एक किलो बीज डुबोकर उपचार किया जाता है.
ठंड के मौसम में गाजर की खपत काफी बढ़ जाती है. खासकर गाजर का हलवा बनाने के लिए इसकी मांग बढ़ती है. ऐसे में सही समय पर तैयार फसल किसानों को मंडी में अच्छी बिक्री का मौका दे सकती है.