एग्रीवेट: राजस्थान से 19 सितंबर को मॉनसून की विदाई हो रही है. इससे पहले 18 सितंबर को लगभग पूरे राज्य में मूसलाधार बारिश हुई है, जो फसलों के लिए संजीवनी बन गई है. मूंग, ग्वार, सोयाबीन और मूंगफली किसानों के चेहरे खिल गए हैं. कृषि विशेषज्ञों और किसान इस बारिश को फसलों के लिए संजीवनी मान रहे हैं. मौसम विभाग के अनुसार इस बार राजस्थान से मॉनसून विदाई होने में एक दिन की देरी ले सकता है. क्योंकि, राजस्थान के कई हिस्सों में 20 सितंबर को भी बारिश की संभावना जताई गई है. उसके बाद राज्य में सूखे मौसम होने का अलर्ट जारी किया गया है. एक नए मौसमी तंत्र के असर से राजस्थान के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई है. मौसम विभाग के अनुसार कई जगह बारिश की गतिविधियां जारी हैं, जो कल 19 सितंबर को भी जारी रहने की संभावना है. 20 सितंबर के बाद राज्य में मौसम शुष्क होने की आशंका जताई गई है. बता दें कि अल नीनो की वजह से सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. लेकिन, मॉनसून विदाई से पहले बारिश ने बड़ी राहत दी है. मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार सबह तक बीते चौबीस घंटे में राज्य के डूंगरपुर, सलूम्बर, उदयपुर जिलों में भारी से अतिभारी बारिश दर्ज की गई. इसी तरह अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, भरतपुर, बूंदी, सवाईमाधोपुर, सिरोही, टोंक जिलों में मध्यम से भारी बारिश हुई. इस दौरान बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमन्द, प्रतापगढ़, बारां, दौसा, धोलपुर, जयपुर, ब्यावर, कोटा, सीकर, झुंझुनू, सिरोही, बीकानेर, डीडवाना कुचामन, नागौर, फलोदी, जोधपुर तथा पाली जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई।
सबसे अधिक 200 मिलीमीटर बारिश आसपुर (डूंगरपुर) में हुई. मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार 18 और 19 सितंबर को भी जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, जयपुर कोटा भरतपुर संभाग के कुछ भागों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है. वहीं पश्चिमी राजस्थान के कुछ भागों से 19 सितंबर के आसपास बारिश की गतिविधियों में कमी होने तथा मानसून विदाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल रह सकती हैं. दक्षिण-पूर्वी व पूर्वी राजस्थान में 20 सितंबर को भी कहीं-कहीं हल्की मध्यम बारिश हो सकती है. हालांकि 21 सितंबर से राज्य के अधिकतर भागों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. मौसम के जाते जाते मूसलाधार बारिश से मूंग, सोयाबीन, ग्वार और मूंगफली की फसलों को संजीवनी मिल गई है. यह फसलें पकने की स्थिति में हैं और इन्हें पानी की जरूरत थी. ताजा आंकड़ों के अनुसार ग्वार की बुवाई 22.34 लाख हेक्टेयर और मूंग की बुवाई 23.17 लाख हेक्टेयर में की गई है. हालांकि, कम बारिश की वजह से यह बुवाई टारगेट से कम रही है. इस साल कम बारिश का असर ग्वार, मूंग और मोठ की फसल पर देखा गया है. लेकिन, आज हुई बारिश और कल होने वाली बारिश से फसल को पकने और दाना मजबूत होने में मदद मिलेगी.