पराली जलाने वालों पर हरियाणा सरकार की सख्त कार्रवाई, 21 गिरफ्तार और 52 प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: हरियाणा में पराली जलाने के मामलों पर कार्रवाई तेज कर दी गई है. राज्य सरकार के मुताबिक, धान की कटाई के मौजूदा सीजन में पराली जलाने से जुड़े मामलों में अब तक 52 प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई हैं और 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वालों से 10 हजार रुपये का पर्यावरण मुआवजा भी वसूला गया है. वहीं, पंजाब में भी पराली जलाने पर रोक और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी की जा रही है.

वहीं, वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने बैठक की. इसमें हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी भी मौजूद रहे. राज्य के कृषि निदेशक अमित खत्री ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की 13,200 मशीनें बांटी गई हैं, जबकि लक्ष्य 9,000 मशीनें बांटने का था. अमित खत्री ने बताया कि पराली जलाने के मामलों में किसानों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड में लाल निशान वाली प्रविष्टियां भी दर्ज की गई हैं.

अमित खत्री ने कहा कि सरकार ने पराली जलाने पर रोक लगाने और प्रदूषण कम करने के लिए ये कदम उठाए हैं. हरियाणा में पराली जलाने पर रोक लगाने के साथ ही फसल अवशेषों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है. पराली जलाने वाले किसानों से पर्यावरण मुआवजा वसूला जाता है. वहीं, जिन किसानों के खिलाफ पराली जलाने के मामले में राजस्व रिकॉर्ड में लाल निशान वाली एंट्री की जाती है, वे अगले दो फसल सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी फसल नहीं बेच सकते.

अमित खत्री ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के स्तर पर पराली जलाने की घटनाओं की पहचान के लिए राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र की ओर से विकसित मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रही है. इसके जरिए सैटेलाइट डेटा की मदद से जले हुए खेतों की जांच की जाती है. इसके अलावा, इस सीजन में 27 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा पराली के इस्तेमाल के लिए जिला स्तर पर उद्योगों के साथ समझौते किए गए हैं. बैठक में बताया गया कि 30 सितंबर तक बायोमास से बिजली बनाने वाले संयंत्र 7 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा पराली का इस्तेमाल कर चुके हैं. वहीं, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों में 1 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा पराली का उपयोग किया गया है.

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार आ रही कमी की सराहना की. उन्होंने झज्जर जिले के बादली क्षेत्र में पराली से ईंधन इस्तेमाल करने वाली मॉडल ईंट भट्ठा इकाई की भी तारीफ की. राज्य के NCR से बाहर के आठ जिलों में ईंट भट्ठों में पराली से बने पेलेट का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं, इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर स्टेशन ने कोयले के साथ पराली जलाने के अपने लक्ष्य का 73 फीसदी हासिल कर लिया है.

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष शेखर विद्यार्थी ने बताया कि निगरानी के पहले चरण में 20 ड्रोन तैनात किए गए हैं. इसके अलावा, 30 और ड्रोन तैनात करने की योजना है. इनकी मदद से पराली जलाने वाले इलाकों की पहचान करने और घटनाओं पर नजर रखने में मदद मिलेगी.

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने राज्य सरकार के साथ अलग से बैठक की. इसमें पराली जलाने पर रोक लगाने और फसल अवशेषों के सही प्रबंधन के लिए तैयार कार्ययोजना पर चर्चा की गई. आयोग ने 15 मई को राज्य को इस संबंध में निर्देश दिए थे. बैठक में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए जमीनी स्तर पर की जा रही कार्रवाई, जिलों की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की गई. साथ ही, फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों की उपलब्धता और किसानों तक उनकी पहुंच पर भी चर्चा हुई.

केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पराली प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है. आयोग ने कहा कि धान की कटाई के व्यस्त सीजन में फसल अवशेषों को इकट्ठा करने और उनके इस्तेमाल की व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए. साथ ही, किसानों के पास उपलब्ध फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का सही तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए.

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