डिजिटल सर्वे की गड़बड़ी से धान खरीद पर संकट, पंजीकरण नहीं होने से कम दाम पर उपज बेच रहे किसान – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्रीस्टैक के तहत किसान पंजीकरण में आ रही दिक्कतों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में खेतों में धान की फसल खड़ी होने के बावजूद डिजिटल सर्वे में गलत फसल दर्ज की जा रही है. इसके अलावा गाटा संख्या में गड़बड़ी, सर्वे कर्मचारियों की लापरवाही और तकनीकी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में किसान अपना पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं.

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्रीस्टैक में गड़बड़ियों के कारण उत्तर प्रदेश के कई किसानों को धान बेचने में परेशानी हो रही है. संगठन के मुताबिक, पंजीकरण नहीं होने की वजह से किसानों का धान सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा है. ऐसे में किसान अपनी जरूरतों को पूरा करने और अगली फसल की खेती के लिए पैसों का इंतजाम करने के लिए धान को खुले बाजार और मंडियों में MSP से कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं.

धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि कई जगहों पर खेतों में धान की फसल खड़ी है, लेकिन डिजिटल सर्वे और ई-खसरा में दूसरी फसल दर्ज कर दी गई है. कहीं उर्द, कहीं मक्का, मूंग और बाजरा जैसी फसलें दर्ज की गई हैं. इससे किसानों का एग्रीस्टैक पंजीकरण और सरकारी खरीद की प्रक्रिया अटक गई है. उनका कहना है कि किसान अपनी गलती नहीं होने के बावजूद सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि धान खरीद का समय लगातार निकलता जा रहा है. संगठन का कहना है कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किसानों को सुविधा देने और सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए होना चाहिए. संगठन ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे में होने वाली गलतियों का खामियाजा किसानों को नहीं भुगतना चाहिए. जब तक सर्वे की गड़बड़ियों को ठीक नहीं किया जाता, तब तक पंजीकरण अनिवार्य होने के कारण किसानों को सरकारी धान खरीद से बाहर रखना उनके लिए आर्थिक नुकसान की वजह बन रहा है.

धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों से डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्रीस्टैक पंजीकरण की गड़बड़ियों को जल्द ठीक करने की मांग की है. संगठन ने कहा है कि तकनीकी खामियों के कारण किसान सरकारी धान खरीद से वंचित न रहें. इसके लिए संगठन ने कई सुझाव और मांगें रखी हैं.

पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट मिले: डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्रीस्टैक में गड़बड़ी के कारण जिन किसानों का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है, उन्हें पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट दी जाए या कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए.

सरकारी केंद्रों पर धान खरीद की व्यवस्था हो: ऐसे किसानों का धान सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं. खतौनी, आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और अन्य जरूरी दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन कर खरीद सुनिश्चित की जाए.

आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए राहत मिले: सर्वे और पंजीकरण की गड़बड़ी के कारण सरकारी केंद्रों पर धान नहीं बेच पाने वाले किसानों को मंडियों में कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है. संगठन ने ऐसे किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए राहत देने की मांग की है.

सर्वे की गलतियां सुधारने के लिए अभियान चले: डिजिटल क्रॉप सर्वे में गलत फसल, गाटा संख्या और जमीन से जुड़ी गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए. किसानों की शिकायतों का प्राथमिकता से निपटारा हो.

खेतों का मौके पर जाकर सत्यापन हो: जिन किसानों की फसल का सही विवरण सर्वे में दर्ज नहीं हुआ है, उनके खेतों का मौके पर जाकर सत्यापन किया जाए. साथ ही, सर्वे में लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए.

तकनीकी गलती के कारण योजनाओं का लाभ न रुके: जब तक सर्वे और पंजीकरण से जुड़ी शिकायतों का समाधान नहीं होता, तब तक किसी भी पात्र किसान को तकनीकी या विभागीय गड़बड़ी के कारण सरकारी खरीद और अन्य सुविधाओं से वंचित न किया जाए.

धान खरीद के लिए तत्काल निर्देश जारी हों: धान खरीद की समय-सीमा को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिए जाएं, ताकि किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और वे समय पर अपनी फसल बेच सकें.

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