Tip Of The Day: बारिश के बाद बेर किसान आजमाएं ये तरीके, फल होगा बड़ा और ज्यादा उत्पादन मिलेगा – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: बरसात का मौसम खत्म होने के बाद बेर के बागों में पौधों की देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. बारिश के कारण खेत में घास-खरपतवार तेजी से बढ़ जाते हैं और पौधों के आसपास बने थाले भी खराब हो सकते हैं. ऐसे में समय पर सफाई, प्रूनिंग, सिंचाई और पोषण प्रबंधन नहीं किया गया तो पौधों की बढ़वार और आगे मिलने वाली पैदावार प्रभावित हो सकती है. डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी) के अनुसार, इस समय बाग की साफ-सफाई के साथ पौधों की शाखाओं और मिट्टी की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए.

बरसात के बाद बेर के पौधों  के आसपास घास और खरपतवार तेजी से उग आते हैं. ये मिट्टी से नमी और पोषक तत्वों का उपयोग करते हैं, जिससे बेर के पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता. इसलिए सबसे पहले पौधों के आसपास उगी अनावश्यक घास और खरपतवार को हटा दें. इसके बाद पौधों के चारों ओर बने थाले को दोबारा ठीक करें. इससे सिंचाई के दौरान पानी पौधे की जड़ों तक आसानी से पहुंचता है और नमी को बनाए रखने में मदद मिलती है.

बेर के पौधों  में सही समय पर कटाई-छंटाई यानी प्रूनिंग करना अच्छी पैदावार के लिए महत्वपूर्ण है. पौधे के दो से तीन साल का होने के बाद कमजोर, सूखी और अनावश्यक शाखाओं को हटाया जा सकता है. इससे पौधे पर शाखाओं का अनावश्यक बोझ कम होता है और मजबूत शाखाओं के विकास के लिए बेहतर जगह मिलती है. फल देने वाली शाखाओं को पर्याप्त प्रकाश और हवा मिलने से फल की गुणवत्ता और आकार बेहतर रखने में मदद मिल सकती है.

कटाई-छंटाई के बाद पौधों  की उचित देखभाल करना भी जरूरी है. प्रूनिंग के बाद 2 प्रतिशत थायोयूरिया या पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है. इससे नई शाखाओं के विकास में मदद मिल सकती है और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी बीमारियों से बचाव में भी सहायता मिलती है. हालांकि किसी भी रसायन का इस्तेमाल करने से पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह और निर्धारित मात्रा का पालन करना जरूरी है.

बरसात के बाद बेर के बाग में जलभराव बिल्कुल न होने दें. लंबे समय तक खेत में पानी  जमा रहने से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. वहीं, मिट्टी में नमी कम होने पर जरूरत के अनुसार सिंचाई करें. पौधों की अच्छी बढ़वार और बेहतर फल विकास के लिए मिट्टी की स्थिति के अनुसार खाद और आवश्यक पोषक तत्व भी दें. समय पर खरपतवार नियंत्रण, थाले की मरम्मत, प्रूनिंग, सिंचाई और पोषण प्रबंधन से बेर के पौधों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है. सही देखभाल के साथ बेर के पौधों से लंबे समय तक अच्छी पैदावार ली जा सकती है और बड़े आकार व बेहतर गुणवत्ता वाले फल किसानों को बाजार में बेहतर कीमत दिलाने में मदद कर सकते हैं.

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