एग्रीवेट: Sugar Mill Inspection: त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों पर नियंत्रण रखने और बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों पर निगरानी बढ़ा दी है. मिलों की ओर से दिए गए जीएसटी विवरणों में विसंगतियां मिलने के बाद सरकार ने जांच और कार्रवाई शुरू कर दी है. आज से यानी (9 अक्टूबर) से चीनी मिलों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा. वहीं, बिक्री लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली मिलों पर भी कार्रवाई हो सकती है. दूसरी ओर तमिलनाडु सरकार ने गन्ना किसानों को प्रति टन 709.50 रुपये अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है.
केंद्र सरकार को चीनी मिलों की ओर से 17 से 19 अगस्त के बीच जमा किए गए विवरणों में विसंगतियां मिली हैं. खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, इन गड़बड़ियों की जांच जीएसटी रिकॉर्ड, बिक्री बिल, खरीदारों की जानकारी और चीनी की ढुलाई व उठान से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है. चीनी एवं वनस्पति तेल विभाग के निदेशक अरविंद कुमार रावत ने मंत्रालय की ओर से जारी नोट में स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में गड़बड़ी साबित होगी, वहां संबंधित मिलों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने मिलों को 20 से 31 अगस्त के बीच हुई चीनी की बिक्री का विवरण भी 10 अक्टूबर तक जमा करने का निर्देश दिया है.
सरकार ने आज से (9 अक्टूबर) से चीनी मिलों का सघन भौतिक सत्यापन कराने का फैसला किया है. इसके तहत अधिकृत सरकारी अधिकारी मिलों के रिकॉर्ड की जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि बिक्री से जुड़े निर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं. इसके अलावा, अक्टूबर के पहले 15 दिनों के लिए निर्धारित बिक्री लक्ष्य पूरा करना भी मिलों के लिए जरूरी होगा. पहले सप्ताह के लिए तय बिक्री कोटे का 45 प्रतिशत बेचना होगा, जबकि बची हुई निर्धारित मात्रा दूसरे सप्ताह में बेचनी होगी. मंत्रालय के अनुसार, बिक्री लक्ष्य पूरा नहीं करने या सरकारी निर्देशों का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
अगस्त के आखिरी दिनों में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. आंकड़ों के अनुसार, अब यह घटकर 55.06 रुपये प्रति किलो रह गई है. एक महीने पहले कीमत 61.33 रुपये और एक साल पहले 59.05 रुपये प्रति किलो थी. चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे बेमौसम बारिश और कीटों के हमले से उत्पादन प्रभावित होने को प्रमुख कारण बताया गया है. देश में चीनी उत्पादन का अनुमान शुरुआती 3.43 करोड़ टन से घटकर 3.06 करोड़ टन रह गया है. कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र ने कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है. इसके साथ ही, बड़े थोक उपभोक्ताओं और व्यापारियों के स्टॉक पर सीमा लगाई गई है. मिलों के मासिक बिक्री कोटे को भी पाक्षिक आधार पर आवंटित किया जा रहा है.
चीनी उद्योग से जुड़ी एक अन्य घोषणा में तमिलनाडु सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गन्ना किसानों को 709.50 रुपये प्रति टन अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का ऐलान किया है. राज्य के कृषि मंत्री आर. विनोद के मुताबिक, 9.5 प्रतिशत चीनी रिकवरी के आधार पर किसानों को कुल 4,000 रुपये प्रति टन मिलेंगे. यह राशि राज्य परामर्श मूल्य (SAP) के तहत निर्धारित 3,290.50 रुपये प्रति टन के अतिरिक्त होगी. इस योजना पर राज्य सरकार 603.34 करोड़ रुपये खर्च करेगी और करीब 90,000 किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है. जिन किसानों के गन्ने में चीनी की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से अधिक होगी, उन्हें 4,000 रुपये प्रति टन से ज्यादा राशि मिल सकती है. हालांकि, प्रोत्साहन का भुगतान संबंधित समितियों की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा.