गेहूं बुवाई के लिए सही किस्म का चुनाव जरूरी, जानें DBW-371 करण वृंदा किस्म क्यों बोएं किसान – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Wheat Variety: गेहूं की अच्छी पैदावार के साथ अनाज की पोषण गुणवत्ता बढ़ाना चाहते हैं, तो भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल की विकसित DBW 371 (करण वृंदा) किस्म किसानों के लिए एक विकल्प हो सकती है. यह जैव-संवर्धित किस्म सिंचित परिस्थितियों में अगेती बुवाई के लिए अनुशंसित है. इसकी औसत उपज 75.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि अनुकूल परिस्थितियों में उपज क्षमता 87.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है. इसके दानों में प्रोटीन, आयरन और जिंक भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं.

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के अनुसार, DBW 371 गेहूं की किस्म  उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए अनुशंसित है. इसमें पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के अलावा राजस्थान के कोटा और उदयपुर संभाग को छोड़कर अन्य क्षेत्र शामिल हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में झांसी संभाग को छोड़कर इसकी अगेती बुवाई की सिफारिश की गई है. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के जम्मू और कठुआ जिले, हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले और पांवटा घाटी तथा उत्तराखंड के तराई क्षेत्र के किसान भी इसकी खेती कर सकते हैं. हालांकि, इसकी बुवाई सिंचित परिस्थितियों में ही करने की सलाह दी गई है.

करण वृंदा गेहूं की औसत उपज  75.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. वहीं, इसकी अधिकतम उपज क्षमता 87.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है. अनुकूल मौसम, मिट्टी और बेहतर फसल प्रबंधन में किसान इसकी अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं. इस किस्म में बाली निकलने की अवधि लगभग 102 दिन है, जबकि फसल 147 से 153 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. पौधों की ऊंचाई करीब 100 सेंटीमीटर रहती है. इसे पीले और भूरे रतुआ रोग के प्रति प्रतिरोधी भी बताया गया है, जिससे इन रोगों के कारण होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है.

DBW 371 की खासियत केवल इसकी उपज क्षमता तक सीमित नहीं है. यह जैव-संवर्धित गेहूं किस्म  है, जिसके दानों में 12.2 प्रतिशत प्रोटीन, 44.9 पीपीएम आयरन और 39.9 पीपीएम जिंक पाया जाता है. इसके अलावा, एक हजार दानों का वजन लगभग 46 ग्राम और हेक्टोलीटर भार 81 किलोग्राम प्रति हेक्टोलीटर है. इसकी चपाती गुणवत्ता को 10 में से 7.7 अंक दिए गए हैं. इस तरह बेहतर उत्पादन के साथ गेहूं की पोषण गुणवत्ता और रोटी की गुणवत्ता को महत्व देने वाले किसानों के लिए यह किस्म उपयोगी विकल्प बन सकती है.

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