एग्रीवेट: तमिलनाडु सरकार ने भले ही किसानों की मांग पर गाय और भैंस के दूध का खरीद भाव बढ़ दिया है, पर पशुपालकों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. किसानों का आरोप है कि सहकारी दूध समितियां बढ़े हुए दाम में से 4 रुपये प्रति लीटर काट रही हैं. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. खास बात यह है कि यह मामला तब सामने आया, जब 3 अक्टूबर को सहकारी समितियों ने किसानों के बैंक खातों में दूध का भुगतान किया.
दरअसल, राज्य सरकार ने पिछले महीने गाय के दूध का खरीद भाव 38 रुपये से बढ़ाकर 44 रुपये प्रति लीटर किया था. वहीं, भैंस के दूध का खरीद भाव 53 रुपये प्रति लीटर तय किया गया. हालांकि, तिरुचि जिले के किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है कि उन्हें खरीद कीमतों में को पूरा लाभ नहीं मिल रहा है. पुंगनूर के किसान एस. सेल्वम ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि उनके खाते में गाय के दूध के लिए 40 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से भुगतान आया. जब किसानों ने अधिकारियों से इस बारे में सवाल किया तो उन्हें अलग-अलग मदों में कटौती की जानकारी दी गई.
किसानों का कहना है कि सरकार ने दूध का खरीद भाव बढ़ाया है, लेकिन कटौती के बाद उन्हें बढ़ी हुई कीमत का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. किसानों का कहना है कि कई साल की मांग के बाद दूध का खरीद भाव बढ़ाया गया है, ऐसे में इस बढ़ी हुई रकम में से किसी तरह की कटौती नहीं होनी चाहिए. तमिल मनीला कांग्रेस के किसान विंग के कोषाध्यक्ष वायलूर एन. राजेंद्रन ने सरकार से किसानों को दूध का पूरा खरीद भाव दिलाने की मांग की. उन्होंने कहा कि इन दिनों पशुपालन करना आसान नहीं है. किसानों को पशु चारा खरीदने पर काफी पैसा खर्च करना पड़ता है. ऐसे में दूध के बढ़े हुए खरीद भाव का पूरा लाभ किसानों को मिलना जरूरी है.
वहीं, आविन (तिरुचि) के प्रभारी महाप्रबंधक पी. सुंदर वडिवेलु ने कहा कि दूध समितियों के प्रशासनिक खर्च के लिए 1.75 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है. इसके अलावा 1 रुपये प्रति लीटर की राशि बाद में किसानों को दी जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के भुगतान से बोनस के नाम पर कोई राशि नहीं काटी जाएगी. यानी किसानों की ओर से लगाए गए पोंगल बोनस की कटौती के आरोप से आविन ने इनकार किया है.
आविन के तिरुचि अधिकारियों के मुताबिक, दूध समितियों को मिलने वाले 1.75 रुपये प्रति लीटर में से 50 फीसदी रकम उनके प्रशासनिक खर्च में इस्तेमाल होगी. बाकी रकम का इस्तेमाल दूध उत्पादकों को बोनस देने में किया जाएगा. इन कटौतियों के बाद किसानों के बैंक खातों में 41.25 रुपये प्रति लीटर की राशि जमा होगी. अधिकारियों ने बताया कि किसानों को भुगतान की पूरी प्रक्रिया समझाने के लिए पर्चे भी तैयार किए जा रहे हैं. इनमें बताया जाएगा कि दूध की कीमत और अलग-अलग मदों में होने वाली कटौती के बाद किसानों को कितना भुगतान मिलेगा.
हालांकि, तमिलनाडु मिल्क प्रोड्यूसर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त सचिव एन. गणेशन ने 1 रुपये की कटौती कर बाद में उसे प्रोत्साहन राशि के रूप में लौटाने की व्यवस्था पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया जरूरी नहीं है और इसे बंद किया जाना चाहिए. यूनियन को किसानों के खाते में पूरी राशि जमा करनी चाहिए. किसानों का कहना है कि समितियों की ओर से इस तरह की कटौती पहले से होती रही है और पहले यह रकम बहुत बड़ी नहीं थी. लेकिन अब दूध का खरीद भाव बढ़ने के बाद किसानों को मिलने वाली राशि में कटौती की जा रही है. किसान नेता राजेंद्रन ने कहा कि पशु चारा, फीड और दूसरे कृषि इनपुट की लागत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में किसानों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ डालना ठीक नहीं है. उन्होंने सरकार से प्रशासनिक और अन्य संबंधित खर्च खुद उठाने की मांग की.