एग्रीवेट: World Egg Day 2026: अंडा सिर्फ नाश्ते का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्वों का किफायती स्रोत भी है. इसके बावजूद भारतीय घरों में अंडे को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं प्रचलित हैं. कोई इसे दिल की बीमारी का कारण मानता है, तो कोई बुखार या सर्दी-जुकाम में बच्चों को अंडा खिलाने से परहेज करता है. वहीं, सोशल मीडिया पर नकली प्लास्टिक अंडों और बर्ड फ्लू को लेकर भी कई बार डर फैलता है. विश्व अंडा दिवस 2026 के मौके पर आइए जानते हैं अंडे से जुड़े ऐसे 5 मिथक और उनके पीछे की सच्चाई, ताकि खानपान से जुड़े फैसले अफवाहों के बजाय सही जानकारी के आधार पर लिए जा सकें.
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे वीडियो सामने आते हैं, जिनमें कुछ अंडों को प्लास्टिक का बताकर लोगों को सतर्क किया जाता है. हालांकि, अंडे के छिलके, सफेदी या जर्दी में असामान्य बदलाव दिखना अपने आप में नकली होने का प्रमाण नहीं है. अंडों के आकार, रंग, छिलके की बनावट और अंदरूनी संरचना में प्राकृतिक अंतर हो सकता है. अंडों के बड़े पैमाने पर प्लास्टिक से नकली विकल्प के रूप में उत्पादन किए जाने के दावों के लिए विश्वसनीय प्रमाण जरूरी हैं. केवल वीडियो देखकर किसी अंडे को नकली घोषित करना सही नहीं है. यदि अंडे से असामान्य गंध आती है, वह टूटा हुआ है या उसके खराब होने का संदेह है, तो उसे नहीं खाना चाहिए. खरीदते समय साफ, बिना दरार वाले अंडे लें और उन्हें उचित तापमान पर रखें.
अंडे की जर्दी में कोलेस्ट्रॉल होता है, इसलिए लंबे समय तक इसे दिल की सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता रहा है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अंडा खाने से हर व्यक्ति को दिल की बीमारी हो जाएगी. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, स्वस्थ लोग संतुलित खानपान का हिस्सा बनाकर अंडे खा सकते हैं. हालांकि, इसका असर व्यक्ति की सेहत और पूरे आहार पर निर्भर करता है. जिन लोगों को हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या दिल से जुड़ी समस्या है, उन्हें अंडे की मात्रा को लेकर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. अंडे को बहुत ज्यादा तेल, मक्खन या नमक के साथ खाने के बजाय उबालकर या कम तेल में पकाकर खाना बेहतर विकल्प हो सकता है.
बर्ड फ्लू की खबर आते ही कई लोग अंडे और चिकन खाना छोड़ देते हैं. लेकिन संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने का खतरा और अच्छी तरह पकाए गए भोजन का जोखिम एक जैसा नहीं है. अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC के मुताबिक, अंडे और पोल्ट्री उत्पादों को उचित तापमान पर पूरी तरह पकाने से बर्ड फ्लू सहित कई हानिकारक वायरस और बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं. हालांकि, कच्चे या अधपके अंडे खाने से बचना चाहिए. यदि किसी क्षेत्र में बर्ड फ्लू का प्रकोप है, तो स्थानीय प्रशासन और पशुपालन विभाग की सलाह का पालन करना जरूरी है. बीमार या मृत पक्षियों को छूने से भी बचना चाहिए.
कई घरों में सर्दी-जुकाम, बुखार या बीमारी से उबर रहे बच्चों को अंडा देने से परहेज किया जाता है. जबकि अंडा प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्वों का स्रोत है, जो सामान्य वृद्धि और शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है. अगर बच्चा अंडा आसानी से खा और पचा पा रहा है, तो केवल हल्का बुखार या सर्दी-जुकाम होने के कारण इसे पूरी तरह बंद करना आमतौर पर जरूरी नहीं होता. हालांकि, बच्चे की उम्र, एलर्जी, भूख और बीमारी की गंभीरता को ध्यान में रखना चाहिए. छोटे बच्चों को अंडा अच्छी तरह पकाकर दें और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें.