एग्रीवेट: 02 नवंबर 2026, विरुधुनगर: तमिलनाडु में धान की फसल पर तना छेदक और पत्ती लपेटक कीट का असर – जिले में धान की फसल पर तना छेदक और पत्ती लपेटक कीट का असर देखा जा रहा है। क्षेत्रीय मौसम केंद्र, चेन्नई की ओर से जारी ताजा कृषि-मौसम सलाह बुलेटिन में किसानों को समय पर कीटनाशक छिड़काव की सलाह दी गई है।
यह बुलेटिन (संख्या 087/2026) 30 अक्टूबर को जारी हुआ है और 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक के लिए वैध है। बुलेटिन के मुताबिक जिले में धान की फसल बढ़वार और बाली आने की अवस्था में है, जो इन दोनों कीटों के हमले के लिए संवेदनशील मानी जाती है।
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बुलेटिन के मुताबिक तना छेदक के नियंत्रण के लिए एसिफेट 75% एसपी का 670 से 1000 ग्राम प्रति हेक्टेयर की मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है। पत्ती लपेटक के लिए क्लोरपायरीफॉस 20% ईसी का 1250 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर इस्तेमाल किया जा सकता है।
जो किसान जैविक विकल्प चाहते हैं, उनके लिए एजाडिरेक्टिन 0.03% का 1000 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की मात्रा में छिड़काव करने का सुझाव भी बुलेटिन में दिया गया है। यह नीम आधारित कीटनाशक दोनों कीटों पर असरदार माना जाता है।
मौसम केंद्र ने सामान्य तौर पर तमिलनाडु और पुड्डुचेरी के किसानों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। इन इलाकों में कार्बोसल्फान का 400 मिलीलीटर प्रति एकड़ या कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड का 600 ग्राम प्रति एकड़ सुबह या शाम के समय छिड़कने की सिफारिश की गई है।
बुलेटिन में यह भी साफ कहा गया है कि कीटनाशक का छिड़काव बारिश रुकने के बाद ही करें, ताकि दवा असर कर सके और बर्बाद न हो। समय पर निगरानी और छिड़काव से फसल को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
बुलेटिन में पुड्डुचेरी क्षेत्र के धान किसानों के लिए तना छेदक से बचाव के कुछ और विकल्प भी दिए गए हैं। इनमें एजाडिरेक्टिन 0.03% का 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी, कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50% एसपी का 2 ग्राम प्रति लीटर, फ्लूबेंडामाइड 20 डब्ल्यूजी का 0.25 ग्राम प्रति लीटर या थायामेथोक्साम 25 डब्ल्यूजी का 0.2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह शामिल है।
इन विकल्पों से किसानों को अपने इलाके में उपलब्ध दवा और जरूरत के हिसाब से चुनाव करने की सहूलियत मिलती है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि एक ही दवा का बार-बार इस्तेमाल करने से कीटों में उसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) बढ़ने का खतरा रहता है, इसलिए समय-समय पर दवा बदलते रहना बेहतर रहता है।
धान की फसल में बाली आने की अवस्था सबसे संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि इस दौरान कीट का हमला सीधे उपज पर असर डालता है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान अपने खेत का नियमित निरीक्षण करें और पौधों के बीच से तना छेदक या पत्ती लपेटक के लक्षण, जैसे सूखी सिरे वाली बालियां या मुड़ी हुई पत्तियां, दिखने पर तुरंत सलाह के मुताबिक छिड़काव करें। देरी होने पर कीट का प्रकोप पूरे खेत में फैल सकता है, जिससे नुकसान की भरपाई मुश्किल हो जाती है।
तमिलनाडु में इस समय सांबा सीजन की धान फसल खेतों में बढ़वार की अवस्था में है, और नवंबर का महीना इस सीजन के लिए काफी अहम माना जाता है। मौसम केंद्र का कहना है कि आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव होने पर नया बुलेटिन जारी किया जाएगा, इसलिए किसानों को लगातार ताजा सलाह पर ध्यान देने की जरूरत है।
कृषि विस्तार अधिकारियों का यह भी कहना है कि दवा का छिड़काव करते समय खेत में पानी का सही स्तर बना रहना चाहिए, क्योंकि बहुत कम या बहुत ज्यादा पानी में छिड़काव का असर कम हो जाता है। साथ ही छिड़काव के लिए इस्तेमाल होने वाले पंप और नोजल की सफाई का भी ध्यान रखने की सलाह दी गई है, ताकि दवा की मात्रा पूरे खेत में बराबर पहुंच सके।