एग्रीवेट: Sugar Quota For October 2026: त्योहारी सीजन के बीच चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और बाजार में कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने अक्टूबर महीने के दूसरे पखवाड़े का बिक्री कोटा जारी कर दिया है. इसके तहत कुल 16 लाख मीट्रिक टन चीनी बेचने की अनुमति दी गई है. इसमें 14 लाख मीट्रिक टन चीनी मिलों के लिए और 2 लाख मीट्रिक टन आयात की गई चीनी के लिए रखा गया है. सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से बाजार में चीनी की कमी और कीमतों में अचानक उछाल जैसी स्थिति से निपटने में मदद मिल सकती है.
सरकार ने 13 से 31 अक्टूबर 2026 तक के लिए चीनी का नया बिक्री कोटा तय किया है. इसके तहत चीनी मिलों को घरेलू बाजार में बिक्री के लिए 14 लाख मीट्रिक टन चीनी का कोटा मिला है. वहीं, एडवांस ऑथराइजेशन के तहत आयात की गई चीनी के लिए 2 लाख मीट्रिक टन का अलग कोटा तय किया गया है. इस तरह अक्टूबर के दूसरे हिस्से के लिए कुल 16 लाख मीट्रिक टन चीनी का आवंटन किया गया है. इस कोटे के जरिए सरकार घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई को बनाए रखना चाहती है, ताकि मांग बढ़ने पर भी बाजार में इसकी कमी न हो.
पहले सरकार पूरे महीने के लिए चीनी बिक्री का कोटा तय करती थी. अब इस व्यवस्था को बदलकर हर पखवाड़े यानी करीब 15 दिन के हिसाब से कोटा जारी किया जाता है. इससे बाजार की मांग और चीनी की उपलब्धता को ध्यान में रखकर बिक्री का इंतजाम किया जा सकता है. सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, यह नए पखवाड़े वाली व्यवस्था के तहत घोषित चौथा कोटा है. इससे पहले अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए चीनी मिलों को 14 लाख मीट्रिक टन चीनी बेचने का कोटा दिया गया था.
अगर सितंबर 2026 की बात करें, तो सरकार ने पूरे महीने के लिए कुल 26.50 लाख मीट्रिक टन चीनी का कोटा तय किया था. इसमें पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख मीट्रिक टन और दूसरे पखवाड़े के लिए 13.50 लाख मीट्रिक टन चीनी शामिल थी. वहीं, अक्टूबर 2025 में घरेलू बाजार में बिक्री के लिए पूरे महीने का कोटा 24 लाख मीट्रिक टन रखा गया था. इस बार अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े के लिए मिलों को 14 लाख मीट्रिक टन का कोटा मिला है, जबकि आयात की गई चीनी के लिए अलग से 2 लाख मीट्रिक टन तय किया गया है.
चीनी का बिक्री कोटा तय करने का मुख्य मकसद बाजार में इसकी पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है. अगर मांग के मुकाबले बाजार में चीनी कम हो जाए, तो कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. ऐसे में सरकार कोटे के जरिए यह तय करती है कि एक तय समय सीमा में कितनी चीनी बेची जा सकती है.