एग्रीवेट: GM Rice Controversy: देश में जेनेटिकली मॉडिफाइड यानी जीएम फसलों को लेकर एक बार फिर विवाद बढ़ गया है. इस बार मामला जीएम बासमती चावल की खेती से जुड़ा है. सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रोड्रिग्स की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की गई है. याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गया है कि केंद्र सरकार ने जीएम फसलों को लेकर अदालत के 2024 के फैसले का पालन नहीं किया. वहीं, जीएम बासमती चावल की खेती को कथित मंजूरी दिए जाने पर भी चिंता जताई गई है.
सोमवार को वकील प्रशांत भूषण ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के सामने यह मामला उठाया. इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं. वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि, खरपतवार खत्म करने वाली दवाओं को सहन करने वाली जीएम बासमती चावल की किस्मों की खेती को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई है.
ऐसे में अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि यह याचिका साल 2025 में दायर की गई थी, लेकिन अब तक इस पर सुनवाई नहीं हो सकी है. उनके मुताबिक, इस मामले को जीएम सरसों से जुड़े विवाद की सुनवाई कर रही विशेष पीठ के सामने भी उठाया गया था, लेकिन वहां इसे सुनने से इनकार कर दिया गया.
जीएम फसलें ऐसी फसलें होती हैं, जिनके गुणों में बदलाव करने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाते हैं. वहीं, खरपतवारनाशक सहनशील फसलें ऐसी होती हैं, जिन पर खरपतवार खत्म करने वाली कुछ दवाओं का असर कम पड़ता है. इससे खेत में खरपतवार हटाने में मदद मिल सकती है, लेकिन ऐसी फसलों के पर्यावरण और दूसरी फसलों पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं.
प्रशांत भूषण ने अदालत में चिंता जताई कि जीएम बासमती चावल से देश की पारंपरिक बासमती किस्मों पर बुरा असर पड़ सकता है. उन्होंने आशंका जताई कि दूसरी किस्मों में इसके गुण पहुंचने से बासमती की पहचान और खेती को नुकसान हो सकता है.
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2024 के फैसले से जुड़ा है. उस दिन जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने जीएम फसलों से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था. हालांकि, एक मुद्दे पर दोनों जजों की राय अलग-अलग थी. इसलिए उस मुद्दे पर आगे फैसला लेने के लिए मामला बड़ी पीठ के पास भेज दिया गया था. अवमानना याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को विशेषज्ञों, राज्य सरकारों और दूसरे संबंधित पक्षों से सलाह लेकर जीएम फसलों पर एक राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश दिया था. लेकिन याचिकाकर्ता का दावा है कि यह नीति तैयार होने से पहले ही चावल की कुछ किस्मों को जारी कर दिया गया.
याचिका में दावा किया गया है कि ‘RobiNOweed’ नाम से खरपतवार खत्म करने वाली दवाओं को सहन कर सकने वाली जीएम बासमती चावल की किस्में मई 2024 में बाजार में उतारी गई थीं. इसके अलावा, ‘कमला’ नाम से जीन में बदलाव करके तैयार की गई चावल की किस्मों को भी मई 2025 में जारी किए जाने की बात कही गई है. इनमें DRR Rice 100 और Pusa DST Rice 1 जैसी किस्में शामिल हैं.
याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकार ने पहले भरोसा दिया था कि जीएम फसलों को लेकर कोई व्यापक नीति बनने तक ऐसी फसलों को खुले पर्यावरण में नहीं छोड़ा जाएगा. लेकिन अब चावल की इन किस्मों को जारी करने का कदम सरकार के उसी भरोसे के खिलाफ है.