गेहूं MSP मुद्दा फिर गरमाया, 25 रुपये बढ़ोतरी को SKM ने बताया नाकाफी, C2+50 फीसदी की मांग – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Wheat MSP Hike: रबी सीजन की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर किसानों और सरकार के बीच एक बार फिर बहस तेज हो गई है. केंद्र सरकार ने 2027-28 के मार्केटिंग सीजन के लिए छह रबी फसलों के MSP को मंजूरी दी है. इसमें गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है. लेकिन किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इस बढ़ोतरी को मानने से इनकार कर दिया है. संगठन का कहना है कि, गेहूं के MSP में यह बढ़ोतरी किसानों की लागत के मुकाबले काफी कम है.

केंद्र सरकार ने 30 सितंबर को छह रबी फसलों के नए MSP को मंजूरी दी थी. इसमें गेहूं का समर्थन मूल्य 25 रुपये बढ़ाया गया है. SKM ने इसी बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि 25 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा यानी सिर्फ 25 पैसे प्रति किलो बैठता है. संगठन ने इसे किसानों के लिए सम्मानजनक बढ़ोतरी नहीं माना है. SKM का कहना है कि, खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में MSP में इतनी कम बढ़ोतरी से किसानों को राहत नहीं मिलेगी.

SKM की मुख्य मांग है कि, MSP तय करने में खेती की पूरी लागत यानी C2 लागत को आधार बनाया जाए और उसके ऊपर 50 फीसदी मुनाफा जोड़ा जाए. संगठन के मुताबिक मौजूदा गणना में A2+FL लागत को आधार माना जाता है. A2 में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और खेती पर किसान की ओर से किए गए दूसरे सीधे खर्च शामिल होते हैं. वहीं FL में परिवार के सदस्यों की मेहनत की कीमत जोड़ी जाती है. SKM का कहना है कि इसमें किसान की अपनी जमीन के किराये और अपनी लगाई पूंजी पर ब्याज जैसी लागत पूरी तरह शामिल नहीं होती.

SKM के अनुसार C2 लागत के आधार पर गेहूं का MSP 2,744 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए. संगठन ने बताया कि, उसकी गणना में C2 लागत 2,279 रुपये आती है और उस पर 50 फीसदी जोड़ने के बाद यह आंकड़ा निकलता है. वहीं SKM ने गेहूं के लिए 2,610 रुपये के मौजूदा MSP को इस हिसाब से कम बताया है. संगठन का दावा है कि सरकार जिस 106 फीसदी रिटर्न की बात कर रही है, वह उसकी लागत गणना से मेल नहीं खाता.

SKM ने यह भी सवाल उठाया कि राज्यों की ओर से भेजी गई MSP की सिफारिशों को कितना महत्व दिया गया. संगठन के मुताबिक महाराष्ट्र ने गेहूं के लिए 4,525 रुपये प्रति क्विंटल, गुजरात ने 4,200 रुपये, पश्चिम बंगाल ने 3,450 रुपये और पंजाब ने 3,168 रुपये MSP की मांग की थी. हरियाणा की सिफारिश भी 2,652 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई, जो केंद्र की ओर से तय MSP से ज्यादा है. SKM का कहना है कि खेती राज्य का विषय है, इसलिए राज्यों की सिफारिशों को भी MSP तय करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए.

SKM ने सरकारी खरीद के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाया है. संगठन के मुताबिक 2025-26 के सीजन में गेहूं की कुल फसल का करीब एक चौथाई हिस्सा ही सरकारी खरीद के दायरे में आया. संगठन का कहना है कि अगर किसान की पूरी उपज MSP पर नहीं खरीदी जाती, तो सिर्फ MSP घोषित करने से उसे वास्तविक फायदा नहीं मिलता. इसी वजह से SKM ने हर राज्य में हर फसल की सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की है.

SKM ने किसानों और ग्रामीण युवाओं से नए MSP आदेश की प्रतियां गांवों में पढ़कर विरोध दर्ज कराने और उनकी प्रतियां जलाने की अपील की है. संगठन ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन जारी रखने की भी बात कही है. SKM की मांग है कि MSP को कानूनी गारंटी दी जाए, C2+50 फीसदी के आधार पर कीमत तय हो, राज्यों को अपनी ओर से बोनस देने की पूरी छूट मिले और खेती की लागत तय करने का तरीका बदला जाए.

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