महाराष्ट्र में गन्ना पेराई पर किसानों की आपत्ति, 15 अक्टूबर के बजाय 15 नवंबर से शुरू करने की मांग – एग्रीवेट

Team Agrivate
6 Min Read

एग्रीवेट: महाराष्ट्र में किसान संगठनों ने 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने के प्रस्ताव का विरोध किया है. संगठनों की मांग है कि चीनी मिलों में पेराई का काम 15 नवंबर के बाद शुरू किया जाए. किसान संगठनों ने कहा कि अगर पेराई शुरू करने की तारीख पर दोबारा विचार नहीं किया गया तो 8 अक्टूबर को पुणे में गन्ना आयुक्त कार्यालय के सामने ‘आक्रोश मोर्चा’ निकाला जाएगा.

दरअसल, किसान संगठनों का कहना है कि 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने पर चीनी की रिकवरी कम रह सकती है. इससे किसानों को मिलने वाला रिटर्न प्रभावित हो सकता है और चीनी मिलों की लागत बढ़ सकती है. संगठनों ने यह भी कहा कि इसका असर बाजार में चीनी की कुल उपलब्धता पर पड़ सकता है. संगठनों के मुताबिक, इस साल बारिश कम हुई है. आमतौर पर जनवरी, फरवरी और मार्च में गन्ने से चीनी की रिकवरी ज्यादा रहती है. उनका दावा है कि सीजन की शुरुआत में पेराई करने पर रिकवरी करीब 9 फीसदी रह सकती है. इससे मिलों की चीनी उत्पादन लागत बढ़ सकती है और किसानों के भुगतान पर भी असर पड़ने की आशंका है.

शिवसेना शेतकरी सेना के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. जलंदर पाटील ने चीनी मंडी से कहा कि कम बारिश के कारण गन्ना किसान दबाव में हैं. उन्होंने कहा कि जनवरी से मार्च के बीच रिकवरी बेहतर रहती है. ऐसे में जल्दी पेराई शुरू करने से कम रिकवरी के कारण किसानों और चीनी मिलों, दोनों पर असर पड़ सकता है. पाटील ने चीनी की दो अलग-अलग कीमतें तय करने का सुझाव भी दिया. उन्होंने घरेलू इस्तेमाल वाली चीनी की कीमत 20 रुपये प्रति किलो और व्यावसायिक इस्तेमाल वाली चीनी की कीमत 80 रुपये प्रति किलो रखने की मांग की.

महाराष्ट्र के किसान संगठनों ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाकर 55 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है. शिवसेना शेतकरी सेना के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. जलंदर पाटील ने कहा कि आयातित कच्ची चीनी की कीमत करीब 52 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है. इसमें परिवहन और प्रोसेसिंग का खर्च करीब 15 रुपये प्रति किलो और जुड़ जाता है. ऐसे में घरेलू चीनी का MSP 55 रुपये प्रति किलो किया जाना चाहिए.

किसान संगठनों ने गन्ने के FRP भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया. कोल्टे ने बताया कि तय समय में FRP का भुगतान नहीं करने या देरी पर ब्याज नहीं देने वाली चीनी मिलों के खिलाफ राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (RRC) के तहत कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा कि समय पर RSF रिपोर्ट जमा नहीं करने वाली मिलों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है. वहीं, किसान नेता सावकर मदनाइक ने मांग की कि FRP और ब्याज से जुड़ी रिपोर्ट समय पर जमा नहीं करने वाली मिलों के निदेशक मंडल और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए. उन्होंने यह भी मांग की कि किसानों का बकाया जिम्मेदार लोगों की व्यक्तिगत संपत्ति से वसूलकर किसानों को दिया जाए. किसान संगठनों के मुताबिक, गन्ना आयुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है.

दरअसल, हाल ही में शिवसेना शेतकरी सेना, जय शिवराय किसान संगठन, शेतकरी-शेतमजूर संगठन, किसान मोर्चा, शरद जोशी से प्रेरित शेतकरी संगठन, स्वाभिमानी संभाजी ब्रिगेड और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों ने पुणे में गन्ना आयुक्त डॉ. संजय कोल्टे से मुलाकात की थी. प्रतिनिधियों ने उन्हें अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन भी सौंपा था.

Share This Article