एग्रीवेट: Karnataka Drought 2026: कर्नाटक में सूखे ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बारिश की कमी के चलते राज्य में बड़ी मात्रा में फसलें बर्बाद होने का दावा किया गया है. सरकार के मुताबिक करीब 90 प्रतिशत फसलों को नुकसान पहुंचा है. ऐसे हालात में किसानों को तुरंत राहत देने के लिए राज्य सरकार ने पहली किस्त के तौर पर 2,500 रुपये देने का फैसला किया है. वहीं, केंद्र से मदद का इंतजार अब भी जारी है. राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र ने प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की राहत राशि तय कर दी है, लेकिन अभी तक पैसा जारी नहीं हुआ है.
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बेल्लार के हलकुंडी गांव में सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा किया. उन्होंने बताया कि राज्य की कुल 240 तहसीलों में से 217 को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है. बाकी 23 तहसीलों में अभी जांच चल रही है. सरकार का अनुमान है कि आने वाले दिनों में इनमें से 10 से 15 और तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा सकता है.
राज्य सरकार ने सूखे से हुए नुकसान का कुल अनुमान करीब 46,000 करोड़ रुपये लगाया है. सरकार ने केंद्र से 11,000 करोड़ से 11,500 करोड़ रुपये तक की मदद मांगी है. उपमुख्यमंत्री के मुताबिक राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष यानी एनडीआरएफ के नियमों के तहत केंद्र से तय सीमा के हिसाब से ही सहायता मांगी जा सकती है. राज्य सरकार इस मामले में केंद्र को दो बार मदद के लिए अनुरोध भेज चुकी है.
राज्य सरकार का कहना है कि, केंद्र सरकार ने किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की मुआवजा राशि तय की है, लेकिन अभी तक केंद्र की ओर से फंड नहीं मिला है. ऐसे में किसानों को इंतजार में छोड़ने के बजाय कर्नाटक सरकार अपनी तरफ से 2,500 रुपये की पहली किस्त देने जा रही है. सरकार ने कहा है कि किसानों को संकट से निकालना उसकी पहली प्राथमिकता है.
सूखे की मार सिर्फ एक फसल तक सीमित नहीं रही. कई इलाकों में किसानों ने पहले ज्वार बोया था, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण फसल सूख गई. इसके बाद कुछ किसानों ने थोड़ी बारिश होने पर मक्का जैसी दूसरी फसल लगाने की कोशिश की, लेकिन पानी की कमी के चलते वह भी सफल नहीं हो सकी. इससे किसानों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है.
राज्य सरकार किसानों को कर्ज के बोझ से भी राहत दिलाने की कोशिश कर रही है. इसके लिए बैंकों से किसानों से कर्ज की वसूली कुछ समय के लिए टालने और पुराने कर्ज के दोबारा इंतजाम की मांग की जा रही है. इसमें सरकारी बैंकों के साथ निजी वित्तीय संस्थानों को भी शामिल किया जा रहा है.