एग्रीवेट: भारतीय चावल निर्यातकों ने सरकार से मांग की है कि दूसरे देशों के निर्यातकों को भी भारत में कृषि उत्पाद भेजने के लिए यूनिट-स्पेसिफिक मंजूरी दी जाए. यह मांग ऐसे समय उठी है, जब चीन ने कथित तौर पर जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) की मौजूदगी के कारण कुछ भारतीय चावल खेपों को खारिज किया है. निर्यातकों के मुताबिक, अब कई देश भारत से आने वाले चावल के आयात के लिए विशेष चावल मिलों को मंजूरी दे रहे हैं. यानी किसी भी मिल से चावल लेने के बजाय संबंधित मिल की जांच और मंजूरी के बाद ही आयात की अनुमति दी जा रही है.
कई भारतीय चावल निर्यातकों ने इस व्यवस्था पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि अगर आयात करने वाले देश भारतीय चावल मिलों को अलग-अलग मंजूरी दे रहे हैं, तो भारत को भी दूसरे देशों से आने वाले कृषि उत्पादों के लिए इसी तरह की व्यवस्था अपनानी चाहिए. भारत का खाद्य नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) भारतीय मानकों के अनुरूप नहीं होने या हानिकारक पदार्थ पाए जाने पर खाद्य उत्पादों की खेपों को नियमित रूप से खारिज करता है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसी खेपों को खारिज किए जाने के बाद संबंधित आयात परमिट को भी निलंबित किया गया या नहीं.
हरियाणा के एक प्रमुख चावल निर्यातक ने कहा कि अगर चीन कथित तौर पर GMO चावल मिलने के आरोप में किसी भारतीय कंपनी के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, तो भारत को भी किसी उत्पाद की खेप खारिज होने पर संबंधित विदेशी निर्यातक कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के फूड इंपोर्ट रिजेक्शन अलर्ट (FIRA) पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, लैब जांच के बाद भारत ने 42 देशों से आए 411 खाद्य उत्पादों की खेपों को खारिज किया था. 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 57 देशों की 619 खेपों तक पहुंच गई. हालांकि, 2023-24 में इसमें कमी आई और 46 देशों की 277 खेपें खारिज की गईं.
वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने चीन की 28 खाद्य उत्पादों की खेपें खारिज कीं. यह संख्या किसी भी देश की तुलना में सबसे ज्यादा थी. इनमें कन्फेक्शनरी, सूखा पपीता, सूखा बेर, सूखी रोजमेरी, डिहाइड्रेटेड स्ट्रॉबेरी, डिहाइड्रेटेड आड़ू, रोस्टेड सीवीड, डिब्बाबंद मशरूम, अंगूर, फ्लेवर्ड ड्रिंक, जैम, मिर्च, सीवीड और सुशी जैसे उत्पाद शामिल थे.
इसी वित्त वर्ष में भारत ने तुर्की की 27 खाद्य उत्पादों की खेपें भी खारिज की थीं. इनमें सूखे अंजीर, सजावटी सामान और ताजे सेब शामिल थे. इसके अलावा ब्रिटेन की 19 और अमेरिका की 12 खेपों को भी भारत ने रिजेक्ट किया था. खाद्य नीति विशेषज्ञ एस. चंद्रशेखरन ने बिजनेसलाइन से कहा कि नियामकीय स्तर पर सुरक्षा उपाय कुछ हद तक मदद कर सकते हैं, लेकिन खाद्य उत्पादों के आयात और निर्यात के लिए तकनीक को अपनाना लंबे समय में बेहतर समाधान हो सकता है. उन्होंने कहा कि दुनिया में तकनीक, जोखिम का आकलन और उसे कम करने के तरीके अपनाकर खाद्य व्यापार में आने वाली तकनीकी बाधाओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है. भारत तकनीक के क्षेत्र में मजबूत है और खाद्य व्यापार में भी इसके कुछ उदाहरण देखने को मिले हैं.
भारत के चावल निर्यातकों ने सरकार से विदेशी कृषि और खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों के लिए पारदर्शी और जोखिम आधारित रजिस्ट्रेशन व्यवस्था बनाने पर विचार करने की मांग की है. उनका कहना है कि इससे खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है. इस महीने की शुरुआत में भारत की कृषि निर्यात प्रोत्साहन संस्था ने सऊदी अरब से मंजूर 778 भारतीय चावल निर्यातकों और मिलर्स की सूची साझा की थी. वहीं, पिछले कुछ महीनों में चीन की एजेंसी GACC की मंजूर सूची से कुछ भारतीय कंपनियों को हटा दिया गया है.