कश्मीरी सेब की खूब हो रही बिक्री, फिर भी किसानों को नहीं मिल रहा सही दाम.. जानें क्यों? – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: एप्पल Farming: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में फलों की मांग बढ़ने लगी है. खासकर कश्मीर से आने वाले सेब की खरीदारी में तेजी देखी जा रही है. बड़े आकार के सेब और खूबसूरत पैकिंग वाले गिफ्ट पैक की मांग ज्यादा है. लेकिन इस बार कश्मीरी सेब के किसानों के लिए अच्छी खबर के साथ एक बड़ी परेशानी भी सामने आई है. दरअसल, सेब की फसल पर स्कैब नाम की फंगल बीमारी का काफी असर पड़ा है. इससे बड़ी मात्रा में सेब की क्वालिटी खराब हुई है और मंडियों में अच्छे सेब की आवक कम हो रही है. इसका सीधा असर किसानों की कमाई पर पड़ सकता है.

कश्मीर फ्रूट ग्रोअर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव जहूर अहद तनात्रे के मुताबिक, दिवाली के दौरान बड़े आकार के सेब और गिफ्ट पैक की मांग काफी अच्छी है. इसके बावजूद बीमारी के कारण मंडियों में जरूरत के मुताबिक अच्छी क्वालिटी वाले सेब नहीं पहुंच पा रहे हैं.

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल कश्मीर के सेब के बागानों में स्कैब बीमारी का असर बड़े स्तर पर देखने को मिला है. इस बार प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह के स्कैब का प्रकोप रहा. इस बीमारी के कारण सेब की ऊपरी सतह और उसकी क्वालिटी प्रभावित होती है. नतीजा यह है कि बाजार में पहुंचने वाले सेब का बड़ा हिस्सा अच्छे दाम पाने की स्थिति में नहीं है.

जहूर अहद तनात्रे के अनुसार, मंडियों में आने वाले कुल सेब में करीब 50 से 55 फीसदी ग्रेड-B और ग्रेड-C के हैं. कुछ जगहों पर यह आंकड़ा 60 फीसदी तक पहुंच रहा है. इन सेबों की बाजार में मांग कम रहती है, इसलिए किसानों को इन्हें बेचने में परेशानी हो रही है.

सेब की खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि ग्रेड-A, ग्रेड-B और ग्रेड-C के सेब तैयार करने में उनकी लागत लगभग एक जैसी रहती है. बाग की देखभाल, खाद, दवाइयों और मजदूरी पर खर्च तो करना ही पड़ता है. लेकिन जब फसल तैयार होती है, तो अच्छी कीमत मुख्य रूप से ग्रेड-A के सेब को ही मिलती है.

ऐसे में अगर बीमारी के कारण सेब का आकार और क्वालिटी प्रभावित हो जाए, तो किसान को अपनी मेहनत और खर्च के मुकाबले कम दाम मिलते हैं. इस बार भी यही स्थिति बनती दिख रही है. इससे किसान ही नहीं, सेब के कारोबारी और खरीदारी करने वाले लोग भी प्रभावित हो रहे हैं.

दूसरी ओर, बिहार के सेब कारोबारी मोहम्मद सोहेल तनवीर ने मौजूदा बाजार भाव पर संतोष जताया है. उनके मुताबिक, दिवाली के कारण सेब की मांग बनी हुई है और बाजार में कीमतें भी ठीक हैं. फिलहाल एक लकड़ी का क्रेट करीब 1,300 रुपये में बिक रहा है, जबकि गत्ते का एक कार्टन अधिकतम 600 रुपये तक में मिल रहा है.

उन्होंने बताया कि इस मंडी से रोजाना करीब 400 से 500 ट्रक सेब देश के अलग-अलग बाजारों के लिए भेजे जाते हैं. हालांकि, त्योहार के समय अच्छी मांग होने के बावजूद स्कैब बीमारी के कारण अच्छी क्वालिटी वाले सेब की कमी बनी हुई है. ऐसे में इस बार कश्मीरी सेब के कारोबार में किसानों के लिए अच्छी मांग के साथ क्वालिटी की चुनौती भी सामने है.

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