एग्रीवेट: अल नीनो के असर से फसल उत्पादन में जोखिम पर भारतीय रिजर्व बैंक की नजर है. आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक में बढ़ती खाद्यान्य कीमतों को देखते हुए महंगाई दर अनुमान बढ़ाया गया है. आरबीआई ने खरीफ उत्पादन प्रभावित होने और रबी सीजन पर भी जोखिम होने की आशंका जताई है. प्याज, चीनी और हरी सब्जियों की ऊंची कीमतों से महंगाई दर बढ़ने पर दबाव बना है. केंद्रीय बैंक ने कहा है कि कि महंगाई की स्थिति अब पिछले वर्ष जितनी अनुकूल नहीं रही और खाद्य एवं ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के साथ आपूर्ति पक्ष के जोखिम भी बढ़ गए हैं.
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान 5.2 फीसदी रखा है. केंद्रीय बैंक ने बुधवार को कहा कि महंगाई की स्थिति अब पिछले वर्ष जितनी अनुकूल नहीं रही और खाद्य एवं ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के साथ आपूर्ति पक्ष के जोखिम भी बढ़ गए हैं. मौद्रिक नीति समिति (MPC) के निर्णयों की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मुद्रास्फीति 4.9 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.7 फीसदी रहने का अनुमान है.
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 5.6 फीसदी लगाया है. वहीं, चालू वित्त वर्ष के लिए कोर मुद्रास्फीति का अनुमान 4.4 फीसदी रखा गया है. आरबीआई गवर्नर ने बताया कि अगस्त में सीपीआई महंगाई 4.5 फीसदी से बढ़कर 4.8 फीसदी हो गई. इस वृद्धि का मुख्य कारण खाद्य और ईंधन कीमतों में तेजी रहा. उन्होंने कहा कि कोर मुद्रास्फीति में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जो इस बात का संकेत है कि मूल्य वृद्धि का दबाव अब अर्थव्यवस्था के अधिक क्षेत्रों में फैलने लगा है.
आरबीआई के अनुसार खाद्य महंगाई अब कुछ चुनिंदा वस्तुओं तक सीमित नहीं है. चीनी और प्याज जैसी वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि अगस्त में ईंधन महंगाई बढ़ने के पीछे प्रतिकूल आधार प्रभाव (बेस इफेक्ट) भी एक कारण रहा. केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में कोर मुद्रास्फीति 4.2 फीसदी रही, जबकि कीमती धातुओं को छोड़कर कोर मुद्रास्फीति 2.9 फीसदी दर्ज की गई.
आरबीआई ने चेतावनी दी कि आपूर्ति पक्ष से जुड़े जोखिम आने वाले महीनों में बने रह सकते हैं. कमजोर मॉनसून, जारी अल नीनो परिस्थितियां, ऊंची ऊर्जा कीमतें और अन्य कमोडिटी कीमतों में मजबूती महंगाई पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सीपीआई बास्केट में शामिल उन वस्तुओं का हिस्सा, जिनकी महंगाई दर 4 फीसदी से अधिक है, लगातार बढ़कर अगस्त में लगभग 37 फीसदी तक पहुंच गया. इससे संकेत मिलता है कि मुद्रास्फीति का दबाव अधिक व्यापक हो रहा है.
संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई और उसका आउटलुक अब उतना अनुकूल नहीं है जितना पिछले वर्ष था. उन्होंने बताया कि अगले तीन तिमाहियों में औसत सीपीआई मुद्रास्फीति लगभग 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि कोर मुद्रास्फीति 4.4 फीसदी के आसपास रह सकती है. इसी परिप्रेक्ष्य में आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया है. गवर्नर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में नीतिगत ब्याज दरों का बदलाव जरूरी हो गया था.