कमजोर मॉनसून से गन्ने पर संकट, अगले साल चीनी निर्यात पर लग सकता है ब्रेक.. बढ़ेगा आयात – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: India Sugar Export 2027: भारत में अगले साल चीनी का निर्यात प्रभावित हो सकता है. इसकी बड़ी वजह देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में सामान्य से कम बारिश और कई इलाकों में सूखे जैसे हालात हैं. महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश ने 2027 की गन्ने की फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी है. चीनी उद्योग से जुड़े संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA का कहना है कि अभी उत्पादन का सही अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी, लेकिन मौजूदा स्थिति में अगले साल देश में अतिरिक्त चीनी बचने की संभावना कम है. ऐसे में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए भारत को चीनी आयात का सहारा लेना पड़ सकता है.

महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य हैं. इन दोनों राज्यों के कई हिस्सों में इस साल बारिश सामान्य से कम रही है. कुछ इलाकों में हालात सूखे जैसे भी बताए जा रहे हैं. सीएनबीसी टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी का कहना है कि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अगले सीजन में चीनी का कुल उत्पादन कितना रहेगा. संगठन जमीनी स्तर पर फसल की स्थिति का जायजा ले रहा है. अक्टूबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक तस्वीर ज्यादा साफ होने की उम्मीद है. अगर गन्ने की फसल प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर अगले साल चीनी के उत्पादन पर पड़ सकता है.

चीनी का उत्पादन कम रहने की आशंका के बीच चीनी उद्योग का कहना है कि अगले साल भारत के पास विदेशों में बेचने के लिए ज्यादा चीनी नहीं बच सकती. ऐसे में देश की जरूरत पूरी करने के लिए बाहर से चीनी मंगानी पड़ सकती है. सरकार पहले ही 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात करने की मंजूरी दे चुकी है. इसमें करीब 8 लाख टन चीनी के आयात को विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी डीजीएफटी की मंजूरी भी मिल चुकी है.

हालांकि, अभी विदेश से चीनी खरीदना कारोबारियों के लिए फायदे का सौदा नहीं है. इसकी वजह है कि भारत में चीनी के दाम इस समय दुनिया के बाजार में चल रहे दामों से कम हैं. ऐसे में बाहर से महंगी चीनी खरीदकर भारत में बेचना मुश्किल होगा. ब्राजील से चीनी लेकर कुछ जहाज भारत पहुंच भी चुके हैं. अब चीनी कारोबारी दुनिया के बाजार में चीनी के दामों पर नजर रख रहे हैं.

चीनी के साथ एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी उद्योग ने अपना रुख साफ किया है. ISMA के मुताबिक, एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के रस या बी-हैवी शीरे की जगह सी-हैवी शीरे से ज्यादा उत्पादन किया जा सकता है. इससे एथेनॉल का उत्पादन जारी रहेगा और चीनी बनाने के लिए उपलब्ध गन्ने पर दबाव भी कम रहेगा. खासकर तब, जब अगले साल की गन्ने की फसल को लेकर पहले से अनिश्चितता बनी हुई है.

आने वाले त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. ISMA के मुताबिक, अक्टूबर में सरकार की ओर से करीब 23 से 25 लाख टन चीनी का रिलीज कोटा तय किया जा सकता है. त्योहारों से पहले बड़ी कंपनियां और थोक खरीदार आमतौर पर चीनी का स्टॉक बढ़ाना शुरू कर देते हैं. ऐसे में बाजार में अचानक कमी न हो, इसके लिए सरकार ने भी कई कदम उठाए हैं.

चीनी की मौजूदा उपलब्धता को लेकर उद्योग का कहना है कि त्योहारों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. सरकार ने स्टॉक रखने की सीमा समेत कुछ उपाय भी किए हैं, ताकि बाजार में जरूरत से ज्यादा जमाखोरी न हो और कीमतों पर दबाव न बढ़े. घरेलू चीनी की कीमतें भी फिलहाल सामान्य स्तर के करीब पहुंच गई हैं. उद्योग को उम्मीद है कि त्योहारों का सीजन बिना किसी बड़ी कीमत बढ़ोतरी के निकल सकता है. हालांकि, अगले साल की तस्वीर गन्ने की फसल पर निर्भर करेगी. महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश और खेतों में गन्ने की स्थिति का आकलन आने वाले हफ्तों में ज्यादा साफ करेगा कि भारत चीनी निर्यात करेगा या घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए आयात बढ़ाएगा.

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