एग्रीवेट: रबी सीजन की फसलों की बुवाई के लिए खाद संकट की चिंताओं को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज चौहान ने दूर करते हुए कहा कि सरकार के यूरिया और डीएपी का भरपूर स्टॉक मौजूद है. उन्होंने कहा कि किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी. उन्होंने किसानों तक वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की जानकारी पहुंचाने पर जोर देते हुए वैज्ञानिकों को जमीन पर उतरने की सलाह दी. वहीं, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी ने कहा कि किसान देश का पेट भरते हैं और उनका पेट भरने के लिए 2014 से हर साल फसलों की एमएसपी बढ़ाई जा रही है. मूल्य बढ़ने का फायदा किसानों को हो रहा है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड के रांची में गढ़खटंगा स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर बॉयोटेक्नोलॉजी (IIAB) के नए प्रशासनिक भवन, नेक्स्टजेन ब्रीडिंग सेंटर समेत अन्य भवनों का उद्घाटन किया. रबी किसान गोष्ठी एवं कृषि सामग्री वितरण कार्यक्रम के तहत केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि झारखंड की धरती बलिदान और स्वाभीमान की धरती है. झारखंड की माटी सभी का मन मोह लेती है. उन्होंने कहा कि आज झारखंड समेत पूर्वी भारत के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण दिन है.
केंद्रीय कृषि एवं कल्याण राज्यमंत्री भगीरथ चौधरी ने कहा कि किसान हमारा पेट भरते हैं इसलिए किसान भगवान तो नहीं है लेकिन भगवान से भी कम नहीं है. उन्होंने कहा कि 2014 से हर साल किसानों के लिए फसलों की एमएसपी बढ़ाई जा रही है. मूल्य बढ़ने का फायदा किसानों को हो रहा है. खेत बचाओ अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीक के आधार पर खेती को आगे बढ़ाने के आवश्यकता है.
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के (ICAR) के डीजी डॉ एम.एल जाट ने कहा कि यह संस्थान झारखंड के किसानों के लिए वरदान साबित होगा. उन्होंने बताया कि इंटीग्रेडेट फार्मिंग के क्षेत्र में इस संस्थान ने काफी अच्छा काम किया है. झारखंड के अधिकांश क्षेत्रों में किसान सिर्फ धान की खेती करते हैं और खेती फिर पूरे साल खाली रहता है. इस पद्धति को बदलने की जरूरत है. राज्य के किसान दलहन और तिलहन की खेती को अपना सकते हैं. किसानों को इससे लाभ होगा, उनकी कमाई बढ़ेगी. वहीं, आईआईएबी के निदेशक डॉ सुजय रक्षित ने कहा कि यह संस्थान झारखंड में कृषि और किसानों के विकास के लिए कार्य कर रहा है. राज्य के किसानों की कृषि संबंधित चुनौतियों से निबटने के लिए यहां के वैज्ञानिक निरंतर नए शोध कर रहे हैं.
झारखंड में कृषि अनुसंधान और नवाचार को नया आयाम…
माननीय केंद्रीय मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संस्थान में ₹119 करोड़ की संस्थागत एवं वैज्ञानिक अवसंरचना से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
इससे पौधों को लगता है दिन समय जल्दी बीत रहा है और वे जल्दी परिपक्व हो जाते हैं. इस तरह से 120 दिनों में परिपक्व होने वाला धान का बीज मात्र 50 दिनों में परिपक्व हो जाता है और खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाता है. इससे बीज उत्पादन करने में समय की बचत होगी साथ ही नए बीज विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों को कम समय लगेगा.